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राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस: उत्तराखंड के बुग्यालों का हो रहा है खगोल सर्वे, 'निसार' से गन्ना फसलों का अध्ययन
Sun, 23 Aug 2026 03:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आफताब अजमत, देहरादून
आफताब अजमत, देहरादून
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 23 Aug 2026 03:25 AM IST
सार
वैज्ञानिकों ने पहले चरण में जिओ स्पेशियल तकनीक से राज्य में 78 बड़े बुग्याल, रिज क्षेत्र चिह्नित भी कर लिए हैं।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तराखंड में अंतरिक्ष से बुग्यालों का सर्वे हो रहा है तो अब नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) की मदद से हरिद्वार और रुद्रपुर की गन्ना फसलों की मैपिंग की जा रही है। इस काम में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) जुटा है। जिसके वैज्ञानिकों ने पहले चरण में जिओ स्पेशियल तकनीक से राज्य में 78 बड़े बुग्याल, रिज क्षेत्र चिह्नित भी कर लिए हैं।
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निसार डाटा बदल देगा गन्ना फसलों की तस्वीर
नासा और इसरो ने पिछले दिनों पहला ऐसा सैटेलाइट नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार(निसार) छोड़ा था, जो कि न केवल बादलों के बीच से भी मैपिंग कर सकता है बल्कि जमीन के भीतर तक जा सकता है। इसके सैटेलाइट डाटा की उपयोगिता के लिए देशभर से 400 वैज्ञानिक संस्थाओं ने आवेदन किया था। इनमें से 65 को मिला, जिसमें यूसैक भी एक है।
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यूसैक के वैज्ञानिक डॉ. शशांक लिंगवाल ने बताया कि हम इस डाटा का इस्तेमाल हरिद्वार और रुद्रपुर की गन्ना फसलों के अध्ययन में कर रहे हैं। उनकी मैपिंग की जाएगी। पैदावार की स्थिति का आकलन किया जाएगा। फसल की पैदावार, पैटर्न और ग्रोथ का अध्ययन किया जाएगा। पहली बार कोई ऐसा डाटा मिलेगा, जो बहुउपयोगी साबित होगा।
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सैटेलाइट अध्ययन, 78 बुग्याल-रिज हुए चिह्नित
प्रदेश में यूसैक ने जिओ स्पेशियल तकनीकी की मदद से बुग्यालों का अध्ययन शुरू किया है। यूसैक वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र बिष्ट ने बताया कि दयारा बुग्याल जैसे राज्य में 78 बुग्याल (ऊंचाई पर स्थित हरे-भरे घास के मैदान) और रिज (लंबी, संकरी और उठी हुई पहाड़ी धार या कटक, जिसके दोनों ओर गहरी ढलान या खाई होती है) क्षेत्र चिह्नित किए जा चुके हैं।
अब इनकी विस्तारित मैपिंग की जा रही है, जिससे राज्य को बड़ा लाभ होगा। ये पता चल सकेगा कि किस बुग्याल की क्या विशेषता है। वहां किस सीजन में भेड़-बकरी जाती हैं। उनकी धारण क्षमता कितनी है। उन बुग्यालों में घास क्षेत्र, वृक्ष रेखा का पता चल सकेगा। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट के साथ ही जहां जरूरी होगा, ड्रोन से भी मैपिंग की जा रही है।
यूसैक में बनेगी स्पेस गैलरी
आईआईटी कानपुर की मदद से यूसैक में जल्द ही स्पेस गैलरी बनने जा रही है। इसमें टेलीस्कोप होगा, जिससे अंतरिक्ष की गहराई को समझा जा सकेगा। वहीं, तमाम अंतरिक्ष उपयोग से जुड़े सैटेलाइट व अन्य के मॉडल भी होंगे। यूसैक के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत का कहना है कि मकसद युवाओं के बीच अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रूचि जागृत करना है।
यूसैक राज्य से जुड़े तमाम सैटेलाइट आधारित अध्ययनों में अपना योगदान दे रहा है। इसकी और मजबूती के लिए हम काम कर रहे हैं। निसार यूटिलाइजेशन प्रोग्राम का प्रोजेक्ट मिलना एक उपलब्धि है, जो राज्य के लिए बेहद कारगर होगी। -प्रो. दुर्गेश पंत, निदेशक, यूसैक