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राष्ट्रीय बालिका दिवस: पिता ने साथ छोड़ा तो मां और नानी बनी सहारा, बेटियों ने पा लिया मुकाम

Thu, 24 Jan 2019 08:56 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 24 Jan 2019 08:56 AM IST
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National girl day 2019 girls struggle story from rishikesh
दीपिका और हिमानी बडोला

ऋषिकेश के श्यामपुर न्याय पंचायत के ग्राम सभा खदरी की दो बहनों दीपिका और हिमानी बडोला का पूरा कुनबा अपराजिता की मिसाल बन गया है। खेलों में नाम रोशन करने वाली दोनों बहनों की कहानी संघर्षों से भरी है।

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पिता का साथ बचपन में ही छूट गया, लेकिन मां शोभा बडोला और नानी देवेश्वरी बड़थ्वाल ने दोनों के हौसलों को उड़ान दी। दोनों बहनों ने खेल को अपना कर्म क्षेत्र बनाया। इसके बाद दीपिका ने हैंडबॉल और हिमानी ने बॉलीबॉल, खो-खो में नाम रोशन किया। 
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दीपिका और हिमानी बडोला की मां शोभा बडोला ने बताया कि पति ने शादी के कुछ साल बाद ही साथ छोड़ दिया था। इसके बाद दोनों बेटियों को लेकर मायके में रहने पड़ा। बेटियों की शिक्षा तथा परवरिश को लेकर काफी चिंता सता रही थी, लेकिन मां (दीपिका व हिमानी की नानी) ने हौसला दिया। 

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उन्होंने बेटियों की परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी। दोनों बेटियों ने भी निराश नहीं किया। दोनों ने ही कक्षा चार से खेल में रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। मेहनत और लगन का असर भी दिखा। दोनों ने जिला और राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में अव्वल आकर मान बढ़ाया। बड़ी बेटी दीपिका ने हैंडबॉल और छोटी हिमानी ने वालीबॉल व खो-खो में पुरस्कार हासिल किए।

हालात विपरीत हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी  
शोभा बडोला ने बताया कि मां (देवेश्वरी बड़थ्वाल) के देहांत के बाद दीपिका को 12वीं के बाद बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। दीपिका राज्य स्तरीय खिलाड़ी रही है, लेकिन हिमानी ने भी हार नहीं मानी। कक्षा चार से पढ़ाई और खेल में अव्वल हिमानी ने वॉलीबॉल और खो-खो की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सात बार स्वर्ण पदक जीते।

पिता साथ देते तो दीपिका को पढ़ाई न छोड़नी पड़ती  

इसके बाद सात वर्षों से लगातार नेशनल स्तर पर खेल रही है। हिमानी की प्रतिभा को देखते हुए क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने सम्मानित भी किया। पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल आने वाली हिमानी आपनी तरक्की का श्रेय अपनी स्व. नानी देवेश्वरी बड़थ्वाल को देती हैं।  

हिमानी ने बताया कि यदि पिता साथ में रहकर सहारा देते तो बड़ी बहन दीपिका भी राष्ट्रीय स्तर तक आगे बढ़ सकती थी। आर्थिक परिस्थितियों के कारण बड़ी बहन दीपिका को पढ़ाई छोड़नी पड़ी। हिमानी का कहना है कि हमें विपरीत परिस्थितियों में उस नाविक से प्रेरणा लेनी चाहिए, जो तूफान के बाद भी पतवार से संघर्ष करते हुए किनारा पाने में सफल होता है

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