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अब नहीं चलेगी प्ले और प्री स्कूलों की मनमानी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 11 Jan 2017 10:07 AM IST
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- फोटो : dummy picture
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उत्तराखंड के प्ले और प्री स्कूल संचालकों की मनमानी पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अब बिना मान्यता के कोई प्ले व प्री स्कूल संचालित नहीं होंगे।
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इनकी फीस, शिक्षक-छात्र अनुपात, ढांचा और सुरक्षा के मानक भी शिक्षा विभाग तय करेगा। दाखिले के दौरान भी इनकी मनमानी पर लगाम लगेगी। प्रवेश के समय बच्चों और अभिभावकों का इंटरव्यू भी नहीं होगा। हर माह पैरेंट-टीचर्स मीटिंग अनिवार्य होगी। साथ ही इन स्कूलों में प्रवेश के मानक भी शिक्षा विभाग तय करेगा।
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आयोग ने अन्य प्रदेशों की तरह उत्तराखंड में भी इस तरह का आदेश भेजा है। इसके अनुसार स्कूलों के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन आवश्यक होगा। जिनका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होगा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ऐसे प्ले स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा।
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संचालकों को बाकायदा शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी। आदेश में स्पष्ट है कि मान्यता के मानक बेहद कड़े होंगे। प्ले-प्री स्कूल मनमाने तरीके से फीस वसूल नहीं कर पाएंगे। 20 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक पूरा करना होगा। साथ ही 20 छात्रों पर एक सहायिका रहेगी। अग्नि हादसों से बचाव के कड़े मानक तय किए गए हैं। इनकी उपेक्षा कर कोई भी प्ले-प्री स्कूल नहीं चल पाएगा। इमारतों का भी मुकम्मल इंतजाम करना होगा।
बता दें कि अब तक प्री और प्ले स्कूलों के संचालन के लिए मान्यता की दरकार नहीं होने से इसका बेजा फायदा उठाया जा रहा था। देहरादून में भी सैकड़ों की तादाद में प्ले व प्री स्कूल हैं। मान्यता की आवश्यकता नहीं होने से तमाम लोगों ने घरों तक में प्ले व प्री स्कूल खोल लिए हैं। इनकी फीस भी भारी भरकम है।
संवेदनशील होकर काम करे सरकार
शिक्षाविद् डॉ. शांति स्वरूप, डॉ. अंजलि अग्रवाल और डॉ. शहाब कहते हैं कि प्ले और प्री स्कूलों को रेगुलेट करना तो ठीक है। लेकिन रेगुलेशन के नाम पर शिक्षा विभाग को विशेषज्ञों की कमेटी गठित करनी होगी। इसमें नौकरशाह नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में लंबे समय से काम करने वाले शिक्षाविदें की मदद लेनी चाहिए। नीति निर्धारण में उदार मानत तय करने होंगे। इसमें भी वर्गीकरण करना होगा। सामाजिक शिक्षा उद्यमियों और मिशनरी शिक्षाविदें को व्यवसायियों से अलग करना होगा।
प्ले या फिर प्री स्कूल सभी के लिए मान्यता लेना अनिवार्य हो गया है। जो मान्यता हासिल नहीं करेगा वह स्कूल संचालित नहीं कर सकता। लिहाजा अब प्ले व प्री स्कूल संचालकों के लिए ऐसा करना जरूरी हो गया है। हम नन्हे-मुन्नों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। बच्चों की सुरक्षा व स्वस्थ शिक्षण हमारी जिम्मेदारी है।
- सीमा जौनसारी, निदेशक बेसिक शिक्षा