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भूला नहीं जा सकता इन नन्हे वीरों का बलिदान

Mon, 19 Jan 2015 04:42 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 19 Jan 2015 04:42 PM IST
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national bravery award candiate.

सम्मान गौरव की बात है, लेकिन बेटी खोने का दु:ख दिल से कभी नहीं जाएगा। चमोली की बहादुर मोनिका के बारे में उनकी मां कमला देवी ने सिसकते हुए ये शब्द कहे।

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चमोली जिले के कर्णप्रयाग ब्लाक स्थित कालेश्वर गांव की वीरबाला स्व. मोनिका को भले ही केंद्र सरकार मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दे रही हो, लेकिन कालेश्वर गांव में रह रही मोनिका की बीमार मां अपनी बेटी को खोने का गम नहीं भुला पाई है।
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16 जून 2014 को कालेश्वर के चंद्रमोहन सिंह रावत की 17 वर्षीय बेटी मोनिका अलकनंदा में तब बह गई थी जब गांव के रमेश लाल का 12 वर्षीय बेटा साहिल नदी में नहाते वक्त डूबने लगा था। तब मोनिका ने बहादुरी दिखाई और वह साहिल को तो अलकनंदा से बाहर निकाल लाई, लेकिन खुद नदी की लहरों के साथ गुम हो गई।

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मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार

national bravery award candiate.

मोनिका राजकीय इंटर कॉलेज लंगासू में 11वीं कक्षा की छात्रा थी। इस वीरबाला को केंद्र सरकार ने मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की है। पुरस्कार लेने के लिए गुरुवार को गांव के प्रधान हरीश चौहान और स्व. मोनिका के दादा बलवंत सिंह दिल्ली पहुंच गए। जबकि मोनिका की मां कमला देवी कुछ दिन पहले ही हुए पथरी के ऑपरेशन के कारण दिल्ली नहीं जा सकीं।

जिस स्थान से मोनिका बही वहां आज तक न तो कोई तटबंध बने और ना ही सुरक्षा इंतजाम हुए। राज्य सरकार इस साहसी बेटी के गरीब परिवार के लिए भी कुछ नहीं कर पाई है। गांव में मोनिका के विकलांग पिता और बीमार मां सहित छह सदस्यीय परिवार का गुजारा स्व. मोनिका के दादा बलंवत सिंह की पेंशन से चलता है।
- हरीश चौहान, ग्राम प्रधान कालेश्वर

स्व. मोनिका का प्रोफाइल

दादा का नाम-बलवंत सिंह
पिता का नाम-चंद्रमोहन सिंह
माता का नाम-कमला देवी
बहन-ऋतु और निकिता
भाई-निखिल

ऋषिकेश के लाभांशु को वीरता पुरस्कार

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ऋषिकेश के चंद्रेश्वरनगर निवासी लाभांशु शर्मा को बहादुरी के लिए 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बहादुर लाभांशु ने अदम्य साहस दिखाते हुए चीला बैराज स्थित शक्ति नहर में डूब रहे दो पर्यटकों को सकुशल बचाया था।

61/2 दयानंद मार्ग, चंद्रेश्वरनगर, ऋषिकेश निवासी लाभांशु शर्मा (17) पुत्र सुरेश चंद्र शर्मा राष्ट्रीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बेलडी हरिद्वार में 10वीं का छात्र है। लाभांशु के पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में अखाड़े में पहलवानी करने के साथ ही अपना अखाड़ा संचालित करते हैं। जबकि मां आरती शर्मा दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर कार्यरत हैं।

शर्मा के इकलौते पुत्र लाभांशु को बचपन से ही कुश्ती का शौक रहा है। बताया कि स्कूल स्तर पर वह 2013 में कांस्य पदक जीत चुका है। इसके लिए लाभांशु को उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। जबकि नवंबर 2014 में शांतिकुंज, हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता में भी लाभांशु ने कांस्य पदक जीता है।

दो घटनाओं में तीन को डूबने से बचाया
लाभांशु ने 24 मई, 2014 को बैराज चीला नहर में डूब रहे दो पर्यटकों को डूबने से बचाया था। शाम के समय लाभांशु दौड़ लगाते हुए अपने घर चंद्रेश्वरनगर लौट रहा था। उसी समय बैराज शक्ति नगर पुल के समीप डूब रहे दो पर्यटकों की आवाज सुनाई दी। पर्यटकों को देख उन्हें बचाने के लिए वह नहर में कूद गया और दोनों का सकुशल बाहर निकाल लाया।

बताया कि दोनों पर्यटक दिल्ली के रहने वाले थे। लाभांशु ने बताया कि इससे पहले 2013 में उसने कुनांऊ गांव की एक महिला को शक्ति नगर में डूबने से बचाया था।

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