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किशोरों के 'कंधे' पर जच्चा-बच्चा की जिम्मेदारी

Sun, 24 Nov 2013 11:18 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 24 Nov 2013 11:18 PM IST
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Natioanl rural health mission

एनआरएचएम के तहत जच्चा बच्चा सेहत की आरसीएच (रिप्रोडेक्टिव चाइल्ड केयर) योजना से निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए अब कार्यक्रम में किशोर स्वास्थ्य को जोड़ा जा रहा है।

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किशोरो के लिए किशोर स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किये जाएंगे। आरसीएच सिर्फ मां और शिशु पर केंद्रीत होने से स्वास्थ्य संकेतकों के निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं हो रहे थे।
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ये रहेंगे प्रोग्राम का हिस्सा
अगले वर्ष से एनआरएचएम के बदले शुरू हो रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में आरसीएच के बदले कार्यक्रम को आरएमएनसीएच एंड ए (रिप्रोडेक्टिव मेटरनल नियोनेटल एंड चाइल्ड केयर और एडोलोसेंट) में तब्दील किया जा रहा है।
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शिशु जन्म के संपूर्ण चक्र के तहत इसमें शिशु मां के साथ परिवार नियोजन, किशोरियों का स्वास्थ्य, पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट को शामिल किया जाएगा। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम भी इसी प्रोग्राम का हिस्सा रहेगा।

कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं विकसित करने के लिए अगले सप्ताह से सभी राज्यों के मिशन निदेशकों की केंद्र ने नई दिल्ली में दो दिवसीय बैठक बुलाई है।

 
तीन वर्षों का बनेगा प्लान
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत अब आरएमएनसीएच एंड ए के लिए अगले तीन वर्षों के लिए प्लान बनेगा। केंद्र ने प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए तीन वर्र्षों के लिए लक्ष्य निर्धारित करने दिसंबर 2013 तक प्लान भेजने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने कार्यक्रम की प्रत्येक तीमाही में समीक्षा करने का फैसला लिया है, जिस आधार पर बजट की किश्तें मिलेंगी।

कारण जिनसे बदला स्वरूप
- प्रसव के दौरान माताओं की बढ़ती मौत और कम संस्थागत प्रसव
- नियोनेटल सुविधाएं कम होने से पैदा होने के साथ शिशुओं की मौत
- बच्चे के जन्म से 5 वर्ष के भीतर कई तरह के संक्रमणों से मौत
- माताओं की प्रीमेच्योर डिलीवरी के बढ़ रहे हैं मामले
- स्वास्थ्य सुविधाओं तक माताओं के पहुंचने में देरी

तय किये लक्ष्य
- शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार जन्म पर 25 से नीचे
- मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 100 से नीचे
- प्रसव केंद्रों में शत प्रतिशत स्वास्थ्य सुविधाएं देना
- किशोरों में एनमिया के माममले 6 फीसदी प्रतिवर्ष घटाना
- किशोरियों में प्रसव धारण को 3.8 फीसदी दर से घटाना
- बाल लिंगानुपात को 0.6 फीसदी की दर से प्रतिवर्ष बढ़ाना
- जनपदों में पोस्ट और एंटीनेटल सुविधा को 7 फीसदी दर से बढ़ाना

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