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नारी निकेतन मामले में सिस्टम बना लापरवाह
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 07 Feb 2016 01:11 PM IST
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नारी निकेतन में 19 संवासिनियों की मौत की जांच के बाद जिला प्रशासन ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जांच रिपोर्ट में सिस्टम की लापरवाही और संवेदनहीनता उजागर हुई है। एक के बाद एक संवासिनी की मौत होती रही और सरकार और अधिकारियों की नींद नहीं टूटी।
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मुख्यमंत्री के आदेश पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व झरना कमठान की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने नारी निकेतन में हुई संवासिनियों की मौत की जांच की थी। कमेटी की ओर से जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई थी। जिलाधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि जांच रिपोर्ट समाज कल्याण सचिव को भेज दी गई है।
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आगे की कार्रवाई शासन की ओर से की जानी है। जांच में सामने आया है कि छह सालों में 19 संवासिनियों की मौत हो चुकी है। साल 2009 में बीमारी के चलते पांच संवासिनियों की मौत हुई थी, लेकिन इन मौतों को सामान्य मानते हुए किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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अगले साल ही 2010 में दो संवासिनियों की मौतों से भी अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा। साल 2014 में भी पांच संवासिनियों की मौत हो गई थी। लेकिन सामान्य मौत बताकर संवासिनियों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
संवासिनी के यौन शोषण के बाद गया ध्यान
नवंबर 2015 में अमर उजाला की ओर से संवासिनी के शारीरिक शोषण के मामले का खुलासा किया गया था। इसके बाद सभी का ध्यान नारी निकेतन की ओर गया।
संवासिनी के शारीरिक शोषण का मामला चर्चाओं में था कि इसी बीच 25 एवं 26 दिसंबर 2015 को दो संवासिनियों की मौत हो गई। संवासिनियों की मौतों का मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो किरकिरी से बचने के लिए सरकार ने जांच बैठाई और अब वहां पर सुधार की कवायद की जा रही है।
साल 2011 को छोड़कर हर साल हुई मौत
वर्ष 2009 से शुरू हुआ संवासिनियों की मौतों का सिलसिला साल 2015 तक जारी रहा। बीच में 2011 एकमात्र ऐसा साल रहा, जब किसी संवासिनी की मौत नहीं हुई। वर्ष 2009 में पांच, 2010, 2012 और 2013 में दो-दो, 2014 में पांच और 2015 में तीन संवासिनियों की मौत हो चुकी है।