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मांग कर अपने लिए पुरस्कार लेना मुझे नहीं आता : नरेंद्र सिंह नेगी
Wed, 17 Jul 2019 03:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 17 Jul 2019 03:12 PM IST
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नरेंद्र सिंह नेगी
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पहाड़ की आवाज प्रख्यात लोक कलाकार नरेंद्र सिंह नेगी का जन्मदिन एक माह बाद 12 अगस्त को है। इससे पहले ही उन्हें संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार के रूप में शानदार तोहफा मिल गया है। नेगी इस पुरस्कार से खुश हैं, उत्साहित भी दिखते हैं। कहते हैं-यह कलाकारों को मिलने वाला बड़ा पुरस्कार है। मेरे काम को मान्यता दी गई है, तो जाहिर तौर पर खुशी हो रही है।
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खुशी के इस मौके पर वह यह कहने से नहीं चूके कि मांग कर अपने लिए पुरस्कार लेना मुझे नहीं आता है। मुझसे इस पुरस्कार के संबंध में न कभी कोई जानकारी मांगी गई, न ही आवेदन करने को कहा गया। कहां से कैसे यह सब हो गया, मुझे पता नहीं है, मगर अच्छा लग रहा है।
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पिछले 44 वर्षों से गीतों के माध्यम से नेगी दा उत्तराखंड के समाज जीवन को हर रंग से सराबोर करते रहे हैं। उन्होंने पहाड़ को झुमाया भी है, गुदगुदाया भी है, रुलाया भी है। पहाड़ की पीड़ा को सामने रखा है और जरूरत पड़ने पर उसकी आवाज भी बनकर उभरे हैं।
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नेगी दा से पहला सवाल होता है कि किसे श्रेय देते हैं, तो तपाक से बोलते हैं-श्रेय उसे, जिसने मुझे यहां तक पहुंचाया, मुझे सुना यानी जनता। आपको पद्म पुरस्कार नहीं मिला, जबकि आप उसके सबसे बडे़ हकदार रहे हैं, नेगी दा से जब यह बात की जाती है, तो वह इसे बहुत सहज ढंग से लेते हैं। कहते हैं-इस काम के लिए कमेटियां होती हैं, जिसे उचित समझा, उसे दिया। कई बार लोगों ने मुझसे कहा कि मैं आवेदन करुं, लेकिन मांगकर पुरस्कार लेना मुझे नहीं आता।