'मोदी की चाय' से कोई मालामाल तो कोई बेहाल
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी कभी चाय बेचा करते थे। अब वह चाय वाले की छवि भुनाने में लगे हैं।
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पार्टी जगह-जगह मोदी टी स्टाल लगा रही है। दून में भी कई ऐसे लोग हैं, जो चाय बेचकर अर्श पर पहुंचे और बड़ा कारोबार करने लगे, लेकिन कई ऐसे भी हैं, जिन्हें कारोबार में नुकसान हुआ और हकीकत की फर्श पर चाय उनके लिए आजीविका का साधन बनी हुई है।
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ऐसे लोगों का कहना है चाय बेचने का काम छोटा नहीं, लेकिन चाय के नाम पर लोकप्रियता बटोर रहे मोदी को चाय वालों की तरफ भी झांकना चाहिए।
चाय वाले से बने फल कारोबारी
केवल 15 साल की उम्र से चाय बेच रहे अजेश मेहनत से बड़े फल कारोबारी बन गए हैं। गणपति फ्रूट कंपनी नाम की फर्म से वह सप्लाई का कारोबार कर रहे हैं।
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38 साल के अजेश अपने संघर्ष के दिन नहीं भूलते। मेहनत के बूते तकरीबन सात-आठ साल से इस कारोबार में वह दिनों-दिन उन्नति कर रहे हैं। अपने बच्चों, छह साल के मनन और छोटे नमन, को भी वह मेहनत का पाठ पढ़ाते हैं।
चाय वाला होना छोटी बात नहीं
पिता भारत भूषण, मां ललिता और पत्नी के साथ नेहरू कॉलोनी स्थित शानदार आवास में रहने वाले अजेश के साथी सुभाष कंडवाल भी उनकी मेहनत की सराहना करते हैं। सुभाष कहते हैं कि चाय वाला होना छोटी बात नहीं।
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कभी चाय बेचने वाले मोदी बेशक प्रधानमंत्री पद की दावेदारी तक पहुंच गए हैं, लेकिन और भी कई ऐसे लोग हैं, जो चाय बेचकर चोटी तक पहुंचे हैं। अब चाय को ग्लैमराइज किया जा रहा है।
कारोबारी से बने चाय वाले
‘नाम इंटरप्राइजेज’ फर्म के नाम से एचसीएल, बिरला यामाहा आदि कंपनियों इंजीनियरिंग कांट्रेक्ट का काम किया।
वर्ष 1995 तक यह फर्म बेहतर चली, इसके बाद वक्त पर आर्डर प्लेस करने में दिक्कत आने लगी। आखिर 2008 तक सतनाम ने कांट्रेक्ट लेने का काम बंद कर दिया। अब संकट आजीविका का था।
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ऐसे में एक रिश्तेदार से छोटी-सी दुकान की मदद मिली और उन्होंने सतनाम टी स्टाल शुरू कर दी। चाय, काफी के काम के बीच सतनाम पुराने दिनों को याद करते हैं तो खो जाते हैं।
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बकौल सतनाम भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी इस वक्त चाय वालों का गुणगान कर रहे हैं। वह जरा उनकी तरफ भी झांकें, जिन्हें किसी वजह से बेहतरीन प्रोफेशन छोड़ लोगों को चाय पिलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।