अपनों ने जड़े नहीं खोदी तो यहां नैया पार लगाएंगे मोदी
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भाजपा जहां मोदी फैक्टर के सहारे उत्तराखंड में सत्ता वापसी का दावा जता रही है, लेकिन 18 सीटों पर बागियों का गणित उसकी चिंता बढ़ा रही है।
बिना चेहरे के उतरी भाजपा में यह मंथन भी हो रहा है कि जीते तो सब ठीक रहेगा, लेकिन हारे तो क्या होगा? पार्टी नेतृत्व बुधवार को हुए मतदान में प्रत्याशियों के समीकरणों के साथ ’अपने’ बागियों के पक्ष में दिखे रुझान का भी आकलन कर रहा है।
सूत्रों की माने तो पार्टी को टिकट कटने से निर्दलीय उतरे प्रत्याशियों की खुली बगावत के अलावा कुछ सीटों पर भितरघात भी नतीजों को लेकर आशंकित कर रहा है। हालांकि पार्टी का दावा है कि 45 से 50 सीटें उनके पक्ष में रहेंगी।
बगावत के उठे सुरों को पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से दबाया
16 जनवरी को टिकट आवंटन के बाद से पार्टी में बगावत के उठे सुरों को पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से दबाया। पार्टी की केंद्रीय लीडरशिप ने टिकट कटने से नाराज अपने चार विधायकों को किसी तरह मना लिया, लेकिन 18 सीटों पर बागियों ने निर्दलीय उतर कर पार्टी की मुसीबतें बढ़ा दी।
इससे निपटने के लिए पार्टी ने नामांकन वापसी का इंतजार करने के बाद दो चरणों में बड़ी कार्रवाई कर 51 लोगों को बाहर कर दिया, लेकिन बगावत कम नहीं हुई। कई सीटों पर मतदान के दिन भी बागियों के बस्तों पर लगी भीड़ की रिपोर्ट मिलने से पार्टी प्रत्याशी चिंतित दिखे।
नरेंद्रनगर सीट पर बागी ओमगोपाल रावत के बस्तों पर भीड़ भाजपा प्रत्याशी सुबोध उनियाल के टक्कर की दिखी। केदारनाथ में आशा नौटियाल फाइट में दिख रही हैं। देवप्रयाग सीट पर भाजपा प्रत्याशी विनोद कंडारी के मुकाबले बागी दिवाकर भट्ट खुद को मजबूत दिखाते दिखे। गंगोत्री सीट पर अधिक नुकसान माना जा रहा है। यहां बागी सूरत राम नौटियाल पार्टी प्रत्याशी गोपाल रावत के लिए चुनौती बनते दिख रहे हैं।
चौबट्टाखाल सीट पर दोनों पार्टी चिंता में
रानीखेत में प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने बागी प्रमोद नैनवाल की काट के लिए अपने प्रचार अभियान को तेज किया, लेकिन कांग्रेस से सीधी टक्कर में नैनवाल का कोण रहने वाला है। यमनोत्री सीट पर कई नेताओं के निष्कासन के बावजूद पार्टी का एक वर्ग अंतिम समय तक केदार सिंह रावत को नहीं पचा पाया।
ऋषिकेश में प्रेमचंद अग्रवाल के खिलाफ संदीप गुप्ता के उतरने से टक्कर त्रिकोणीय बनी हुई है। मसूरी में राजकुमार जायसवाल को पार्टी इस बार बगावत के समीकरण भाजपा के परेशानी बढ़ा रहे हैं जबकि यही स्थिति इस सीट पर वर्ष 2012 में कांग्रेस के लिए थी। विधायक गणेश जोशी के खिलाफ राजुकमार जायसवाल भाजपा के बागी हैं। हालांकि पार्टी बगावत के बावजूद इस सीट पर पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है।
भाजपा के दिग्गज सतपाल महाराज की चौबट्टाखाल सीट पर बागी कविंद्र इष्टवाल के फैक्टर से अधिक यहां हुआ कम मतदान दोनों दलों की चिंता बढ़ा रहा है। काशीपुर में बागी पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल और नैनीताल में बागी यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य के खिलाफ बागी हेम आर्य के पक्ष में हुए मतदान का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके अलावा भी सहसुपर में लक्ष्मी अग्रवाल, कालाढूंगी में हरेंद्र सिंह दरम्याल, जसपुर से सीमा चौहान, प्रतापनगर से राजेश्वर पैन्युली, खानपुर से रविंद्र पनियाला और डीडीहाट से किशन सिंह भंडारी, घनसाली से धनी लाल शाह का फैक्टर भी अहम रहने वाला है।
मोदी फैक्टर को सपोर्ट करते फैक्ट
भाजपा विधानसभा चुनाव प्रचार के बाद अब परिणामों में मोदी फैक्टर पर अधिक भरोसा कर रही है। पार्टी का मानना है कि प्रदेश में मोदी लहर के चलते ही मैदानों में मतदान प्रतिशत बढ़ा, जिससे उनको पूर्ण बहुमत मिलना तय है। पर्वतीय क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत कम रहने की वजह को पार्टी पलायन मान रही है।
पार्टी को अपने दमदार प्रचार अभियान के साथ कांग्रेस के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर दिख रहा है, जिससे भाजपा अपने सियासी गुणा भाग में जीत को लेकर आश्वस्त है। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि पार्टी की जीत का आंकड़ा 45 से 50 सीटों तक रहेगा।
लोगों ने पीएम मोदी के पक्ष में मतदान किया है, जिसका कारण है कि प्रदेश को केंद्र के साथ मिलकर विकास का मौका मिलेगा। हमारा मानना है कि युवाओं और महिलाओं में पीएम मोदी को लेकर खासा उत्साह न केवल उनकी रैलियों में दिखा बल्कि वह मतदान में तब्दील हुआ है।