PM मोदी ने नेपाली पीएम को दी खास निशानी
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नेपाल में आयोजित सार्क सम्मेलन में शिरकत करने गए पीएम नरेंद्र मोदी अपने साथ महाबोधि वृक्ष का वंशज पौधा लेकर गए हैं। मंगलवार को पीएम ने बोधिवृक्ष के पौधे को भेंट किया। यह पौधा माया देवी मंदिर परिसर में लगाया जाएगा।
पौधे की देखरेख फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिकों ने की है। नेपाल तक ले जाने की व्यवस्था भी इन्हीं की थी। अमर उजाला ने 19 नवंबर के अंक में यह खबर प्रकाशित की थी।
वर्ष 2007 में महाबोधि के संरक्षण की जिम्मेदारी एफआरआई के वैज्ञानिकों को दी गई थी। वैज्ञानिकों ने विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके महाबोधि के वृक्ष को न केवल ठीक किया, बल्कि उसके वंशज भी तैयार किए।
बीते सप्ताह वैज्ञानिकों की एक टीम महाबोधि के वंशज पौधे को नेपाल के लिए तैयार करने को गया (बिहार) गई थी।
महाबोधि वृक्ष के अस्तित्व पर मंडराते संकट को देखते हुए वर्ष 2007 में इसके संरक्षण की जिम्मेदारी एफआरआई के वैज्ञानिकों को दी गई थी। सात साल में वैज्ञानिकों ने करीब 120 साल पुराने महाबोधिवृक्ष को एक नया रूप दिया है। इसके वंशज पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं।
यह है बोधिवृक्ष की खासियत
बिहार के गया जिले में स्थित महाबोधि मंदिर परिसर में एक पीपल का पेड़ है। माना जाता है कि 531 ईसा पूर्व में इसी पेड़ के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। तब से इसे महाबोधि वृक्ष कहते हैं।
इसके कई वंशज पौधे दुनिया में हैं। इस कड़ी में एक और वंशज महाबोधि पौधा अब नेपाल जाएगा।
जनकपुर, लुंबिनी में सभाएं
सार्क सम्मेलन से पहले पीएम मोदी राजा जनक की नगरी जनकपुरी और महात्मा बुद्ध के जन्मस्थली लुंबिनी में दो आम सभाएं करेंगे। सार्क सम्मेलन के बाद लुंबिनी में पीएम मोदी नेपाल के पीएम सुशील कोईराला को वंशज महाबोधि पौधा भेंट करेंगे।
बोधि वृक्ष के संरक्षण की जिम्मेदारी हमारे पास वर्ष 2015 तक है। नेपाल यात्रा के दौरान पीएम मोदी जो पौधा ले गए। उसे देखने और वहां तक ले जाने का इंतजाम हमारे साइंटिस्ट की टीम ने किया है। हम इसके सही पालन पोषण के लिए नेपाल को कुछ जानकारियां भी भिजवाएंगे।
- डॉ. एनएसके हर्ष, वरिष्ठ वैज्ञानिक, एफआरआई