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भव्य होगी 'नंदा देवी राजजात' यात्रा
अमर उजाला, नलिनी गुसांई, देहरादून
Updated Thu, 22 Aug 2013 11:04 AM IST
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि नंदा देवी राजजात के लिए एक वर्ष का और समय मिल गया है। अब यह आयोजन और भव्य होगा। उन्होंने कहा कि नंदा देवी राजजात हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान है।
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बुधवार को मधुबन होटल में मां नंदा देवी राजजात का प्रथम दिवस आवरण और विशेष डाक मुहर लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री ने मां नंदा देवी पर दो विशेष डाक टिकट जारी किए।
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केदारनाथ में पूजा बंद
उन्होंने कहा कि इस समय केदारनाथ में पूजा बंद है। बदरीनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री के रास्ते टूटे हैं। अब यात्रा के लिए एक साल का समय और मिल गया है। उन्होंने कहा कि कुरूण वाली यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरी व्यवस्था की जाएगी।
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सीएम ने कहा कि एक लाख 70 हजार लोगों को आपदाग्रस्त क्षेत्रों से बाहर निकाला गया। सांसद और नंदा राजजात पूर्व पीठिका समिति के अध्यक्ष तरुण विजय ने कहा कि इस बार कुरूण वाली पूजा में भव्य दल लेकर पहुंचा जाएगा।
इस मौके पर चीफ पोस्ट मास्टर जनरल एमएस रामानुजन, मुन्ना सिंह चौहान, मेयर विनोद चमोली, राकेश ओबराय आदि उपस्थित थे। मंच का संचालन वंदना बिष्ट ने किया।
निकलेगी कुरूण वाली यात्रा
भले ही नंदा देवी राजजात स्थगित कर दी गई है, लेकिन चमोली के कुरूण से निकलने वाली यात्रा उसी स्वरूप में निकलेगी। चमोली और कुमाऊं के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली नौ यात्राओं से मिलकर नंदा देवी राजजात बनती है।
इनमें से आठ यात्राएं इस बार नहीं निकल रही हैं, लेकिन कुरूण वाली यात्रा की तैयारियां पूरी हैं। नंदा देवी मंदिर समिति कुरूण के अध्यक्ष मंशाराम गौड़ ने बताया कि यात्रा वैधकुंड में पूजा के पश्चात शुरू होगी और जो देवराड़ा पहुंचेगी।
जागर से की मां नंदा की स्तुति
कार्यक्रम में जागर गायकों ने मां नंदा देवी की स्तुति की। प्रीतम भरतवाण ने रूमा-झूमा बाली संध्या जागर प्रस्तुत किया तो बसंती बिष्ट ने ‘पैटणों लैगो गौरा को डोल’ के जरिये मां नंदा देवी को याद किया।
इन्हें किया सम्मानित
इस मौके पर कुछ लोगों को सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में अभय मिश्रा, राजेश वर्मा, मंशाराम, पंडित अरुण मैठाणी, एसपी नवानी, प्रकाश गौड़, दीपक कठैत, प्रत्यूष, बसंती बिष्ट, प्रीतम भरतवाण और एमएस रामानुजन आदि शामिल रहे।
बेटी को करते हैं विदा
नंदा देवी को बेटी की तरह विदा किए जाने को ही नंदा देवी राजजात का नाम दिया गया है। माना जाता है कि शादी के पश्चात मां नंदा के पिता ने उनकी सुध नहीं ली थी। मायके से किसी के ना आने पर नंदा मायके में दुखी रहने लगी।
राजा को पता लगा तो उन्होंने अपनी बेटी को घर बुलाया। फिर नंदा देवी बारह वर्षों तक मायके में ही रहीं। नंदा देवी के बारह साल बाद ससुराल जाने की प्रथा आज भी चली आ रही है।
यही वजह है कि बारह सालों में नंदा देवी राजजात निकाली जाती है। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले सभी गांव के लोग देवी को मिठाई, वस्त्र आदि भेट करते हैं। गढ़वाल में नंदा को ईष्ट देवी भी माना जाता है।
मैं भी विजय, ये भी विजय
कार्यक्रम के दौरान सीएम विजय बहुगुणा ने सांसद तरुण विजय से विशेष लगाव जताते हुए कहा कि वे बिल्कुल मेरी तरह ही हैं। हममें फर्क सिर्फ इतना कि मेरे नाम में शुरू में विजय आता है और इनके नाम में बाद में।
उन्होंने कहा कि हर चीज राजनीति से जुड़ी नहीं होती, बल्कि कुछ चीजें जीवन से भी जुड़ी होती हैं। बस एक-दूसरे पर विश्वास होना चाहिए।