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मौसम के सितम से सिकुड़ा नामिक ग्लेशियर

Sun, 07 Dec 2014 03:42 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नाचनी (पिथौरागढ़)
ब्यूरो / अमर उजाला, नाचनी (पिथौरागढ़) Updated Sun, 07 Dec 2014 03:42 PM IST
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namik glacier is shrinking.

2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नामिक गांव से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नामिक ग्लेशियर की बर्फ इस बार बहुत कम हो गई है। इसकी वजह यह है कि अक्तूबर से इस ग्लेशियर में हिमपात नहीं हुआ।

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बर्फ की लाइन सिकुड़ती जा रही है। लोग इसी प्रतीक्षा में हैं कि यदि इस माह के अंत तक हिमपात हो जाए तो ग्लेशियर फिर से अपने पुराने स्वरूप में आ जाएगा।

नामिक ग्लेशियर से रामगंगा का उद्गम होता है। इस बार अक्तूबर से बारिश और बर्फबारी की रफ्तार थम सी गई है। इस कारण नामिक गांव के लोग चिंता में हैं। ग्लेशियर से कई छोटे स्रोत भी निकलते हैं।
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उसके पानी से नामिक गांव के लोगों के खेतों को पानी मिलता है। नामिक निवासी भगवान सिंह, पूर्व प्रधान तुलसी देवी ने कहा कि पिछले साल तक नवंबर में हिमपात हो जाता था और नामिक ग्लेशियर लबालब भर जाता था। इस बार स्थिति अलग है।

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अगले हफ्ते सक्रिय होगा विक्षोभ

namik glacier is shrinking.

दिसंबर का प्रथम सप्ताह बीत गया है, लेकिन चोटियों पर हिमपात नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि नामिक एक पहचान उसके पीछे की ओर स्थित ग्लेशियर से भी है।

नामिक ग्लेशियर के आसपास मानवीय दखल नहीं के बराबर है। वहां पर वनस्पतियां काफी घनी हैं। फिर अब तक हिमपात न होने से लोग हैरत में हैं।

मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक डा. आनंद शर्मा ने बताया कि शीतकाल की बारिश और चोटियों पर हिमपात पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद ही होता है। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते सिस्टम हल्का सक्रिय होने वाला है। तब ऊंची चोटियों पर हिमपात की संभावना बन सकती है।

पिछले करीब दो माह से मौसम बिल्कुल सूखा चल रहा है। हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी नहीं हुई है। ऐसे मौसम में स्थानीय स्तर पर भी हिम चोटियों में कभी-कभी बहुत हल्का स्नो फॉल होता है जो टिक नहीं पाता। इसलिए ग्लेशियरों में भी बर्फ काफी कम हो गई है। दिसंबर आखिर तक बारिश होने की संभावना रहती है। दिसंबर से फरवरी के बीच बारिश और बर्फबारी के बाद ग्लेशियरों में बर्फबारी का सही आकलन किया जा सकता है।  
- किरीट कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक जीबी पंत हिमालय पर्यावरण विकास संस्थान कोसी कटारमल

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