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शेरवुड कॉलेज प्रकरण: अब लखनऊ डायसिस ने किया कॉलेज पर मालिकाना हक का दावा

Thu, 17 Dec 2020 11:20 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 17 Dec 2020 11:20 PM IST
सार

  • उत्तराखंड हाईकोर्ट में की खुद को पक्षकार बनाने की मांग की

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Nainital Sherwood College Case: Now Lucknow Diocese Claim Ownership Over College
sherwood college - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज के मालिकाना हक और प्रधानाचार्य की कुर्सी की दौड़ में बृहस्पतिवार को नया मोड़ आया है। लखनऊ डायसिस के प्रतिनिधियों ने भी नैनीताल आकर स्कूल पर अपना मालिकाना हक जता दिया है। उन्होंने दावा किया कि शेरवुड कॉलेज और ऑल सेंट्स कॉलेज के साथ ही अन्य संपत्तियों पर लखनऊ डायसिस का मालिकाना हक है।

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लखनऊ डायसिस ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में खुद को पक्षकार बनाने की मांग की है। इस मामले में आगरा डायसिस हाईकोर्ट के उस आदेश में संशोधन को लेकर पहले ही अदालत में जा चुका है, जिसमें कोर्ट ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य पीटर इमेन्युअल को सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए थे। अब मामले की सुनवाई अगले मंगलवार को होगी।
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चर्च ऑफ इंडिया के लखनऊ डायसिस के बिशप और संबंधित विद्यालयों की प्रबंधन समिति के चेयरमैन के विजय मंटोडे के विधिक सलाहकार राकेश सोबती और सोशल एडवाइजर राकेश मिश्रा ने पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही शेरवुड कॉलेज पर लखनऊ डायसिस का ही हक रहा है।
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आगरा डायसिस बड़े अधिवक्ताओं की मदद से कॉलेज को अपने कब्जे में लेने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में अवैधानिक तरीके से चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ने डायसिस और संपत्तियों का बंटवारा कर दिया, जिसके चलते शेरवुड और ऑल सेंट्स कॉलेज पर कब्जा जमा लिया गया। इसके बाद से ही इन संपत्तियों के लिए चर्च ऑफ इंडिया लखनऊ डायसिस न्यायालयों में केस लड़ रही है। 

दोनों ने कहा कि वर्ष 2009 में लखनऊ डायसिस के बिशप विजय मंटोडे ने शेरवुड स्कूल पर मालिकाना हक को लेकर न्यायालय की शरण ली थी। इसके बाद वर्ष 2013 में न्यायालय ने चर्च ऑफ नार्थ इंडिया के अस्तित्व को खत्म कर निर्णय दिया कि शेरवुड कॉलेज पर किसका प्रतिनिधित्व रहेगा, इसे लेकर निचली अदालत से फैसला करवाया जाए। उन्होंने कहा कि शेरवुड कॉलेज को अपनी संपत्ति बताने वाले आगरा डायसिस के नाम न तो सोसायटी का पंजीकरण है और न ही उनके हक में न्यायालय का फैसला।


उन्होंने आगरा डायसिस और उसकी ओर से दोनों प्रधानाचार्य की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए लखनऊ डायसिस को ही असली मालिक बताया। यह भी कहा कि उन्होंने कोर्ट में इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की है। न्यायालय के निर्णय के बाद ही कुछ फैसला लिया जाएगा। उन्होंने हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मौखिक रूप से इंटरवेंशन एप्लीकेशन देने की अनुमति मांगी। अब इस प्रकरण पर मंगलवार को सुनवाई होगी।

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