उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, कहा कैदियों को पैरोल पर छोड़ने के लिए बनाएं गाइडलाइन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में सजायाफ्ता कैदी के संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन करने पर तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार हरवंश चुघ को कैदी को एक लाख रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे कैदियों को पैरोल पर छोड़ने के लिए गाइडलाइन तैयार करें और कैदियों को आपात स्थिति में पैरोल देना सुनिश्चित करें। हाईकोर्ट ने जिले के सभी जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि यदि कोई कैदी जेल अधीक्षक या अन्य माध्यम से पैरोल के लिए आवेदन करता है तो उस पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ ने हरिद्वार के एक कैदी की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता के अनुसार वह हत्या के मामले में 2008 से हरिद्वार जेल में उम्रकैद सजा काट रहा है।
लेकिन, 26 सितंबर 2016 को उसके पिता की मौत हो गई थी। पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उसने जिलाधिकारी हरिद्वार के समक्ष पैरोल के लिए आवेदन किया था।
लेकिन जिलाधिकारी ने उसका आवेदन खारिज कर दिया था। याचिका में कहा गया कि तीन अक्तूबर को उसने पुन: अपने पिता की तेरहवीं और पगड़ी में मात्र 6 घंटे शामिल होने की अनुमति मांगी।
लेकिन, उसे इसके लिए भी पैरोल नहीं दिया गया। हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी के इस रवैये के खिलाफ कैदी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पक्षों की सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए हैं कि वे कैदी को हुई मानसिक व्यथा के हर्जाने के रूप में उसे एक लाख रुपये का भुगतान करें।