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तीन माह में पूरी हो एसिड अटैक मामलों की सुनवाई: हाईकोर्ट

Tue, 13 Jun 2017 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,नैनीताल
ब्यूरो/अमर उजाला,नैनीताल Updated Tue, 13 Jun 2017 12:57 AM IST
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nainital high court decision on acid attack victims
nainital high court

हाइकोर्ट ने एसिड अटैक मामलों को गंभीरता से लेते हुए निचली अदालतों को ऐसे मामलों में तीन माह के भीतर फैसला देने और सरकार को क्रिमिनल इंज्युरी कंपनसेशन बोर्ड का गठन चार सप्ताह में करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने खुले में ऐसिड की बिक्री को प्रतिबंधित करते हुए सरकार को आदेशित किया है कि एसिड अटैक मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होते ही पीड़ित को तत्काल एक लाख रुपये मुआवजा और प्रतिमाह सात हजार रुपये दिया जाए।

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कोर्ट ने अस्पतालों में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए प्राइवेट वार्ड बनाने को कहा है। निजी अस्पतालों को आदेशित किया है कि वे एसिड पीड़ित व्यक्ति को निशुल्क उपचार दें। न्यायालय ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को सात दिन के अंदर जांच पूरी करने का निर्देश दिया। निचली अदालत को तीन माह में फैसला देने को कहा।
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कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसिड की बिक्री नहीं की जा सकती और जो एसिड का थोक व्यापारी है, वो केवल अस्पताल, फार्मेसी या दूसरे लाइसेंस होल्डर, जो इसका व्यापार करता हो, उसे दे सकता है।
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कोर्ट ने तीन माह के भीतर हर जिला और संयुक्त अस्पताल में बर्न वार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि छेड़खानी, पीछा करने, यौन प्रताड़ना के मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

मामले के अनुसार रुड़की निवासी कुंवर सिंह ने 18 दिसंबर 2009 को रुड़की थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कर कहा था कि उसकी पुत्री जब ट्यूशन पढ़कर घर आ रही थी तो अभियुक्त आजम ने उस पर एसिड छिड़क दिया। इस प्रकरण पर निचली अदालत ने पांच अगस्त 2010 को निर्णय देते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। निचली अदालत के इस आदेश के विरुद्ध सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।

हाइकोर्ट के निर्देश के प्रमुख बिंदु

nainital high court decision on acid attack victims
नैनीताल उच्च न्यायालय - फोटो : ‌file photo

-प्रदेश सरकार चार सप्ताह में क्रिमिनल इंज्युरीज कंपनसेशन बोर्ड का गठन करे
-प्रदेश भर के निजी अस्पताल सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ऐसिड अटैक पीड़ितों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं
-उत्तराखंड में एसिड की खुली बिक्री नहीं होगी
-ऐसिड अटेक के मामलों में कमी नहीं आने को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यह सुनिश्चित करें कि ऐसे मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट तत्काल दर्ज हो। इन सब मामलों में जांच सात दिन में राजपत्रित अधिकारी की देखरेख में पूरी हो। राजपत्रित अधिकारी को जांच में कमी पर व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाए।
-ऐसे सभी मामलों की त्वरित सुनवाई हो और ट्रायल कोर्ट मामले का निस्तारण तीन माह में करें। अगर तीन माह से अधिक का समय लगे तो ट्रायल कोर्ट कारणों को रिकार्ड करें।
-राज्य सरकार एसिड अटेक के मामलों के निस्तारण तक चश्मदीद गवाहों को सुरक्षा प्रदान करे
-राज्य सरकार एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास के लिए अलग से नीति बनाए और इनको सरकारी नौकरी में आरक्षण देने के लिए विकलांगता कोटा निर्धारित करे।
-राज्य सरकार एसिड अटैक पीड़ित के पूरी तरह से ठीक न होने तक निशुल्क उपचार सहायता उपलब्ध कराए।

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