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उत्तराखंडः बाहर सन्नाटा, अंदर है तूफान, कांग्रेस के पस्त पड़े नेताओं के फिर मचलने लगे अरमान

Wed, 20 Dec 2017 07:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 20 Dec 2017 07:45 AM IST
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Nagar nikaya chunav uttarakhand 2018 Congress condition
कांग्रेस - फोटो : file photo

विधान सभा चुनाव में हार के बाद से महानगर कांग्रेस के पस्त पड़े नेताओं के अरमान एक बार फिर मचलने लगे हैं। इस बार उनकी निगाहें मेयर की कुर्सी पर लगी है। टिकट बेशक एक को मिलना है, लेकिन जब तक नाम फाइनल नहीं होता तब तक हर दावेदार जोर आजमाइश में जुटा है।

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अभी पार्टी में बाहरी तौर पर सन्नाटा है, लेकिन अंदरखाने दावेदारी के लिए तूफानी कोशिशें हो रही हैं। कोई खेमेबंदी के जरिये तो कोई शीर्ष नेताओं की परिक्रमा करके दावेदारी को मजबूती देने की कोशिश में है।
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 पार्टी के स्तर पर भी सीट की संभावित श्रेणी के हिसाब से रणनीति बनाई जा रही है। मसलन, यदि सीट आरक्षित होती है तो मजबूत चेहरा कौन होगा? यदि महिला सीट हो जाएगी तो किस चेहरे को पार्टी उतारेगी। इसे लेकर अभी से होम वर्क चल रहा है।
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कुछ दावेदार इसी गणित के हिसाब से अपनी दावेदारी को पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ सोच-विचार में हैं। फिलहाल सियासी हवाओं में जो नाम तैरने लगे हैं, उनके बारे में पेश है ये रिपोर्ट।

दिनेश अग्रवाल: मेयर के टिकट के लिए कांग्रेस में सबसे मजबूत दावेदारों में एक नाम पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल का माना जा रहा है। इस नाम पर पार्टी के शीर्ष नेताओं को भी ज्यादा परेशानी नहीं है। विधान सभा चुनाव में हारने के बाद से अग्रवाल सियासी बियाबान से बाहर निकलने को मचल रहे हैं। वह जिस सीट से चुनाव लड़ते हैं, उसका बहुत बड़ा हिस्सा नगर निगम क्षेत्र में है। इस लिहाज से पार्टी भी उनकी दावेदारी को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है।

इनकी निगाहें हैं मेयर के टिकट पर,

Nagar nikaya chunav uttarakhand 2018 Congress condition
suryakant dhasmana
सूर्यकांत धस्माना: पिछला चुनाव हार चुके सूर्यकांत धस्माना की निगाह एक बार फिर मेयर के टिकट पर लगी है। जनाधार के तौर पर धस्माना कमजोर दावेदार तो नहीं हैं, लेकिन सियासी हालात और समीकरण उनके पक्ष में नहीं माने जा रहे हैं। टिकट के लिए उन्हें खासा पसीना बहाना पड़ेगा और जरूरी नहीं कि पार्टी उन पर दांव लगाए ही। दरअसल, पार्टी ने उन्हें देहरादून कैंट से विधान सभा का उम्मीदवार बनाया था। लेकिन वह यह चुनाव हार गए। मेयर की दावेदारी करने पर उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

अशोक वर्मा:  नगर निगम में लंबी राजनीति करने वाले अशोक वर्मा मेयर के टिकट के लिए पिछले दो चुनाव से दावेदारी करते आ रहे है। लेकिन ऐन वक्त पर उनका टिकट काटा जाता रहा है। इस बार भी वह गंभीर दावेदार माने जा रहे हैं। नगर निगम में चार बार पार्षद रहे वर्मा नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। पूर्व कांग्रेस सरकार में दर्जाधारी रहे। वर्तमान में वह पीसीसी सदस्य हैं। यदि सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होती है तो वह कांग्रेस के टिकट के सबसे मजबूत दावेदार होंगे। सामान्य सीट पर भी उनकी दावेदारी कम मजबूत नहीं है।

राजकुमार: पूर्व विधायक राजकुमार कांग्रेस का दलित चेहरा हैं। सीट आरक्षित होने की स्थिति में पार्टी इसी चेहरे पर दांव लगा सकती है। राजकुमार को भी नगर निगम की राजनीति का लंबा अनुभव है। वह तीन बार पार्षद रहे और उसके बाद विधान सभा पहुंचे। महानगर में वह जाना पहचाना चेहरा हैं। इसके अलावा मलिन बस्तियों में उनकी जबर्दस्त पकड़ है। इन समीकरणों के आधार पर उनकी टिकट की दावेदार मजबूत मानी जा रही है।

लाल चंद शर्मा: लाल चंद शर्मा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से हैं। वह पूर्व महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं। देहरादून शहर में वह एक चर्चित चेहरा हैं। नगर निगम के पिछले चुनाव में भी उन्होंने टिकट की दावेदारी की थी। वह एक बार देहराखास से विधान सभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। इस बार भी उनके नाम की खूब चर्चा है। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के करीबी होने के नाते उन्हें गंभीर दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है।
 

इनकी भी है प्रबल दावेदारी

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congress logo
एसपी सिंह: मेयर पद के संभावित दावेदारों में दिनेश अग्रवाल के बाद एक और चौंकाने वाला नाम सामने आया है। यह नाम है एसपी सिंह का। एसपी सिंह अभी तक डोईवाला विधान सभा सीट से हाथ आजमाते रहे हैं। वह पिछले कुछ साल से डालन वाला स्थित अपने आवास में रह रहे हैं। कांग्रेसी हलकों में यह चर्चा गर्म है कि एसपी सिंह भी मेयर पद के टिकट के लिए जोर अजमा रहे हैं।
 
पृथ्वी राज चौहान
कांग्रेसी हलकों में मेयर पद के दावेदार के लिए एक और नाम चर्चा में है। ये नाम है कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष पृथ्वी राज चौहान का। महानगर अध्यक्ष की कमान हाथों में आने के बाद से उन्होंने दून शहर में अपनी पहचान बनाई है। लेकिन संगठन में नेतृत्व परिवर्तन के बाद से से चौहान  की पकड़ थोड़ा कमजोर पड़ी है । माना जाता है कि वह किशोर उपाध्याय खेमे के प्रभाव से ही महानगर अध्यक्ष बने। अब उनकी कुर्सी पर कई नेताओं की निगाह है। सूत्रों की मानें तो चौहान कुर्सी छोड़ने से पहले मेयर का टिकट पक्का करना चाहते हैं।

सुनीता प्रकाश
टिकट की दावेदारों में एक नाम सुनीता प्रकाश का भी चर्चाओं में है। सुनीता प्रकाश पार्टी प्रदेश सचिव हैं और एक स्वयंसेवी संस्था का संचालन करती हैं। वह एडवोकेट हैं और उन्हें एक सुलझी हुई नेता के तौर पर जाना जाता है। पार्टी के कई शीर्ष नेता भी उनके नाम को लेकर उस स्थिति में गंभीर नजर आते हैं, यदि सीट महिला या आरक्षित श्रेणी की होती है। ऐसी स्थिति में पार्टी उन्हें दावेदार बना सकती है। महिला होने के साथ वह दलित चेहरा भी है।

आशा मनोरमा शर्मा डोबरियाल
कांग्रेसी हलकों में एक नाम और चर्चाओं में है। ये नाम है आशा मनोरमा शर्मा डोबरियाल का। वह राज्य आंदोलनकारी मनोरमा शर्मा की पुत्र वधू हैं। मनोरमा शर्मा देहरादून की पहली निर्वाचित मेयर रहीं। उनके निधन के बाद आशा मनोरमा शर्मा राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। महिला चेहरे के तौर पर वह गंभीर और मजबूत दावेदार मानी जा रही है।

नोट: कांग्रेस में अगर कोई और भी है मेयर पद के टिकट का दावेदार तो हमें व्हाट्सएप बताएं: 9456546277
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