पीएम मोदी के इस फॉर्मूले से होगा अन्नदाताओं का कल्याण
किसानों के कल्याण करने वाले पीएम नरेंद्र मोदी के फार्मूले पर काम शुरू हो गया है।
पांच साल में किसानों की आय को दोगुना करने के वादे पर अमल शुरू हो गया है। इसके मद्देनजर नए वित्तीय वर्ष में नाबार्ड उत्तराखंड के 13 जिलों में 18663 करोड़ रुपए के करीब का ऋण वितरित करेगा, जो चालू वित्तीय वर्ष के मुकाबले 12.9 फीसदी अधिक है।
इस राशि को फसलों के अलावा एमएसएमई, एजूकेशन, हाउसिंग समेत कुल आठ विभिन्न श्रेणियों में वितरित किया जाएगा। इसकी पूरी रूपरेखा नाबार्ड ने शासन को सौंपी है।
प्रत्येक वर्ष नाबार्ड उत्तराखंड के लिए वार्षिक ऋण योजनाएं बनाता है। इस बार राज्य में उपलब्ध संसाधनों, बुनियादी सुविधाओं, विस्तार सहयोग, लोगों का तकनीकि कौशल, नवीनतम बजट घोषणाओं, सरकार की प्राथमिकताओं समेत अन्य बिंदुओं के आधार पर वर्ष 17-18 के लिए 18663.72 करोड़ की ऋण योजनाएं बनाई हैं।
जानिए कितनी मिलेगी मदद
इससे संबंधित स्टेट फोकस पेपर भी जारी किया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 11-12 से वर्ष 15-16 के दौरान उत्तराखंड की चक्रवृद्धि विकास दर सात फीसदी थी, जबकि हिमाचल में इसी अवधि की विकास दर 7.78 फीसदी रही। गौरतलब है कि उत्तराखंड में 45 फीसदी कर्मकार कृषि पर आश्रित हैं।
फोकस पेपर में यह भी कहा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में तीखे ढलान हैं और यहां भू-क्षरण (लैंड स्लाइडिंग) एक बड़ी समस्या है। इस वजह से कृषि उत्पादन काफी कम होता है। राज्य में कृषि क्षेत्र को विकसित करने के लिए नाबार्ड के स्तर से जो ऋण योजना बनाई गई है, उसमें कृषि से संबंधित कुल 9795 करोड़ रुपए सुरक्षित किए गए हैं। इसी तरह एमएसएमई के लिए 5890 करोड़, एजूकेशन लोन के लिए 484 करोड़ और अन्य के लिए 238 करोड़ रुपए रखे गए हैं।
नाबार्ड की ऋण संबंधी योजनाओं के संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है। साथ ही विभिन्न बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं को जागरुक करने के लिए सेमिनार का आयोजन भी किया गया है। उन्हें आर्थिक गतिविधियां, ऋण देने की प्रक्रिया आदि के बारे में भी विस्तार को बताया गया है।
केबी दुआ, डिप्टी जनरल मैनेजर (नाबार्ड)