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उत्तराखंड मे चंदा बिखेरती हैं सौहार्द की चांदनी
नरेश थपलियाल/ अमर उजाला, कोटद्वार
Updated Wed, 22 Oct 2014 03:45 PM IST
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मजहब के नाम पर नफरत फैलाने वाले उत्तराखंड कोटद्वार की मुस्लिम महिला से नसीहत ले सकते हैं।
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रमजान में रोजे तो नवरात्र में व्रत
यहां की चंदा खान बरसों से सौहार्द की चांदनी बिखेर रही हैं। चंदा खान के घर में कलमा के साथ गीता के श्लोक भी पढ़े जाते हैं। रमजान में रोजे तो नवरात्र में व्रत रखे जाते हैं।
नगर पालिका क्षेत्र की गैराज रोड पर चंदा खान का घर दीपावली के लिए सज चुका है। रंग-बिरंगी लड़ियां लगी हैं। छोटी दिवाली (आज) गेट को फूलों से सजाया जाएगा। धनतेरस पर शगुन के लिए बर्तन भी खरीदे।
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बड़ी दिवाली को घर की छत पर लगाए तुलसी के पौधे को जलते दीयों से सजाया जाएगा और लक्ष्मी पूजन के बाद प्रसाद वितरण होगा। दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल के फेमिली क्वार्टर में मोहम्मद रफी के घर जन्मी चंदा खान इस संस्कार को मायके से लेकर आईं।
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कट्टरपंथियों ने किया था विरोध
उनकी शादी 1962 में कोटद्वार के यूसुफ खान से हुई। चंदा खान ने जब ससुराल में मायके की तर्ज पर हिंदू हिंदू तीज-त्योहार मनाने का मंसूबा जाहिर किया तो शुरुआत में कुछ कट्टरपंथियों ने विरोध किया।
लेकिन चंदा नहीं मानीं तो सभी को झुकना पड़ा। 69 की हो चुकी चंदा पति युसूफ खान को खो चुकी हैं, मगर बेटे-बेटियों समेत तीज-त्यौहारों के मनाने का सिलसिला जारी है। बेटे-बेटियां भी मां से मिले संस्कारों को उल्लास के साथ निभा रहे हैं।
चंदा ने बेटी मीनू को इस्लाम की इबादत के साथ ही मंदिर जाने की आदत भी डलवाई। आज मीनू नवरात्र में नौ दिन व्रत रखती हैं। वैष्णो देवी की यात्रा कर चुकी हैं। बड़े बेटे अकबर खान साइकिल से बदरीनाथ तक की यात्रा कर चुके हैं।
तीसरी बेटी रेनू खान कुरान और गीता दोनों पढ़ती हैं। वह कलियर शरीफ, अजमेर शरीफ में चादर पोशी करती हैं तो चंडी देवी के दर्शन भी।
छोटा बेटा इब्राहिम खान रमजान में रोजे रखते हैं और सावन में भोले नाथ की पूजा। वह चारधाम और अमरनाथ यात्रा कर चुके हैं। इस परिवार को कई संस्थाएं सम्मानित कर चुकी हैं।