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सेप्टिसीमिया से हुई शेरवुड के छात्र की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल
Updated Mon, 17 Nov 2014 03:47 PM IST
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नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज के छात्र शान प्रजापति (15) की मौत सेप्टीसीमिया से हुई थी। शनिवार शाम दो डॉक्टरों के पैनल ने छात्र का पोस्टमार्टम किया।
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इसके बाद डॉक्टरों ने सेप्टीसीमिया को मौत का कारण बताया। बता दें कि शनिवार को हल्द्वानी के बाम्बे अस्पताल के डॉक्टर छात्र की मौत कैंसर से होने की आशंका जता रहे थे, जो गलत निकली।
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छात्र की मां नीना श्रेष्ठ ने बताया था कि 13 नवंबर को कॉलेज प्रबंधन ने शान के निमोनिया से पीड़ित होने की जानकारी उन्हें दी थी। शनिवार शाम शान का शव मिलने के बाद उसकी मां, बहन और अन्य रिश्तेदार काठमांडू रवाना हो गए।
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नोएडा के सीओ प्रथम ने बताया कि पुलिस ने जल्द से जल्द कागजी कार्रवाई पूरी की। सोमवार को डीजी ऑफिस में रिपोर्ट भेज दी जाएगी। दूसरे राज्य का मामला होने के कारण अनुमान है कि सोमवार या मंगलवार तक एफआईआर ट्रांसफर हो जाएगी।
मामले में छानबीन शुरू
शेरवुड कॉलेज के छात्र की मौत के मामले में पुलिस सक्रिय हो गई है। रविवार को एएसपी श्वेता चौबे के निर्देश पर तल्लीताल थानाध्यक्ष संजय पांडे ने पुलिस बल के साथ कॉलेज पहुंचकर आवश्यक पड़ताल की। बतातें चलें कि नैनीताल और आसपास कई मशहूर पब्लिक स्कूल हैं, जिनकी अपनी चिकित्सा सुविधाएं हैं।
यह अब प्रशासन को तहकीकात करनी चाहिए कि क्या इन अस्पतालों में हॉस्टलर के लिए समुचित प्रशिक्षित चिकित्सा व्यवस्था है क्योंकि देश के कोने-कोने से लोग अपने बच्चों को कॉलेज प्रबंधन के भरोसे हॉस्टल में छोड़े रहते हैं।
एएसपी के निर्देश पर रविवार को पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से प्राथमिक पूछताछ और पड़ताल की। एएसपी श्वेता चौबे का कहना है कि नोएडा में दर्ज रिपोर्ट अभी उनके पास नहीं पहुंची है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इधर, डीएसबी छात्रसंघ सचिव रवींद्र राठौर ने भी मामले की जांच की मांग की है।
सेप्टीसीमिया : खून में फैल जाता जहर
डॉक्टरों के अनुसार सेप्टीसीमिया को सामान्य भाषा में खून में जहर (इंफेक्शन) फैलना कहते हैं। इसमें प्रभावित व्यक्ति के किसी भी एक अंग में इंफेक्शन इतना बढ़ जाता है कि वह खून में पहुंच जाता है और इंफेक्शन पूरे शरीर में फैल जाता है।
रोगी का ब्लड प्रेशर कम होने लगता है और एक बाद एक अंग काम करना बंद कर देते हैं जिससे रोगी की मृत्यु हो जाती है। इसे सेप्टीसीमिया विद शॉक विद मल्टी आर्गन फेलियर कहते हैं।
नोएडा के निजी अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डॉ. अजय अग्रवाल कहते हैं कि निमोनिया होने के बाद भी सेप्टीसीमिया हो सकता है। उनके मुताबिक सेप्टीसीमिया में मरीज की 12 से 36 घंटों के अंदर मौत हो सकती है।