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'नौ की लकड़ी पर निगम ने खर्चे नब्बे रुपये'

Thu, 22 Aug 2013 10:11 AM IST
अमर उजाला, रतनमणी डोभाल, हरिद्वार
अमर उजाला, रतनमणी डोभाल, हरिद्वार Updated Thu, 22 Aug 2013 10:11 AM IST
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municipal corporation haridwar spent 48 lacs

शायद इसे ही कहते हैं नौ की लकड़ी नब्बे खर्च। अपनी 40 लाख रुपये की बकाया धनराशि वसूलने के लिए हरिद्वार नगर निगम ने 48 लाख रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद भी नतीजा सिफर रहा।

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सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर पर यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

यह भी जानकारी मिली कि नगर निगम की संपत्ति पर बनी दुकानों के मालिकों और किराये की वसूली के बारे में निगम के अफसर अनभिज्ञ हैं।

अमर उजाला की ओर से किए आवेदन पर नगर निगम ने जो जानकारी दी उसके अनुसार विश्व प्रसिद्ध प्रसिद्ध मंसा देवी मंदिर तक रोपवे सेवाएं देने वाले कंपनी उषा ब्रेको रोपवे की लीज वर्ष 2011 में समाप्त हो चुकी है।
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कंपनी पर नगर निगम का 40 लाख 68 हजार 335 रुपये बकाया है। रोपवे सेवा के किराये में वृद्धि को लेकर कंपनी 2010 में आर्बीट्रेशन में चली गई थी।

सुनवाई की 26 तारीखें लगीं
अब तक आर्बीट्रेशन में सुनवाई की 26 तारीखें लग चुकी हैं, जिस पर नगर निगम लगभग 48 लाख रुपया खर्च कर चुका है। नगर निगम के लोक सूचना अधिकारी महेंद्र यादव ने सूचना अधिकार के तहत यह जानकारी दी है।
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संपत्तियों का रख-रखाव भी भगवान भरोसे चल रहा है। नगर निगम के लोक सूचना अधिकारी को नहीं पता कि यूनियन भवन तथा हरमिलापी भवन जो नगर निगम की संपत्तियां हैं उनमें जो दुकानें बनी हैं उनका मालिक कौन है। खास बात यह कि नगर निगम को यह तक जानकारी नहीं कि उसकी संपत्ति पर बनी दुकानों का किराया कौन ले रहा है।

नगर निगम की लीज की संपत्तियों में निर्मित दोनों भवनों की सात दुकानों को किराये चढ़ाने वालों ने लाखों रुपये की पगड़ी ली है और हजारों रुपया महीना किराया भी ले रहे हैं। लेकिन नगर निगम अधिकारियों को मालूम नहीं है।


रोवपे के किराये तथा लीज प्रकरण मेरे आने से पहले से चल रहा है। आर्बीट्रेशन में मामला काफी लंबा खिंच गया है। अब तक निस्तारण हो जाना चाहिए था। उम्मीद है कि आर्बीट्रेशन जल्द अपना निर्णय सुना देगा। लीज की संपत्तियों पर बनी दुकानों के प्रकरण की वह जांच कराकर रिपोर्ट लेंगे।
- जीवन सिंह नागन्याल, मुख्य नगर अधिकारी

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