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पहली बार मड-नेस्टिंग मेंढक प्रजाति की हुई खोज : बडोला
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देहरादून। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की डीन डॉ. रुचि बडोला ने बताया कि एक वर्ष में संस्थान ने बुश फ्रॉग की 13 नई प्रजातियों और भारत में पहली मड-नेस्टिंग मेंढक प्रजाति की खोज की है। यह जानकारी सोमवार को संस्थान में शुरू हुई 37वीं वार्षिक अनुसंधान संगोष्ठी (एआरएस) 2026 में साझा की गई। इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) के महानिदेशक व मुख्य अतिथि डॉ. एसपी. यादव ने वन्यजीव संरक्षण और अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भविष्य की भूमिका पर जोर दिया।
संस्थान के निदेशक डॉ. जीएस. भारद्वाज ने कहा कि दो दिन चलने वाली संगोष्ठी में सौ से अधिक पेपर, पोस्टर आदि के माध्यम से विशेषज्ञ अपने अध्ययन साझा करेंगे। उन्होंने बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूआईआई देश के विभिन्न हिस्सों में वन्यजीव अनुसंधान और संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर कार्य कर रहा है। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. जी.एस. रावत ने संरक्षण पद्धतियों को आकार देने में डब्ल्यूआईआई और वन्यजीव शोधकर्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। समन्वयक डॉ. विभाष पांडव ने कहा कि संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध संस्थान के अकादमिक और अनुसंधान समुदाय के समर्पण, विविधता और गतिशीलता को दर्शाते हैं।
कार्यक्रम में वन्यजीव अनुसंधान में सहयोग के लिए भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के अधिकारियों विंग कमांडर अमरदीप कौर, पायलट; लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतीक, पायलट व लेफ्टिनेंट कमांडर जीतू सिंह को सम्मानित किया गया। इस दौरान वैज्ञानिक बिलाल हबीब आदि मौजूद थे।
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पांच प्रकाशनों का विमोचन
उद्घाटन सत्र में डब्ल्यूआईआई के संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं के पांच प्रकाशनों का विमोचन हुआ। इनमें रिवर रिदम: लर्निंग बाय डूइंग मेथड्, एक्सपीरिएंशिया: ए बुक ऑन एक्सपेरिमेंटल लर्निंग- बियॉन्ड क्लासरूम्, ए फील्ड गाइड टू द टाइगर बीटल्स ऑफ रामगंगा कैचमेंट, स्टेटस ऑफ द क्लाउडेड लेपर्ड इन सेलेक्ट साइट्स ऑफ नॉर्थईस्टर्न इंडिया 2026 और पैन-इंडिया असेसमेंट ऑफ एंडेंजर्ड स्पीशीज - निकोबार मेगापोड शामिल हैं।
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संस्थान के निदेशक डॉ. जीएस. भारद्वाज ने कहा कि दो दिन चलने वाली संगोष्ठी में सौ से अधिक पेपर, पोस्टर आदि के माध्यम से विशेषज्ञ अपने अध्ययन साझा करेंगे। उन्होंने बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूआईआई देश के विभिन्न हिस्सों में वन्यजीव अनुसंधान और संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर कार्य कर रहा है। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. जी.एस. रावत ने संरक्षण पद्धतियों को आकार देने में डब्ल्यूआईआई और वन्यजीव शोधकर्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। समन्वयक डॉ. विभाष पांडव ने कहा कि संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध संस्थान के अकादमिक और अनुसंधान समुदाय के समर्पण, विविधता और गतिशीलता को दर्शाते हैं।
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कार्यक्रम में वन्यजीव अनुसंधान में सहयोग के लिए भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के अधिकारियों विंग कमांडर अमरदीप कौर, पायलट
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पांच प्रकाशनों का विमोचन
उद्घाटन सत्र में डब्ल्यूआईआई के संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं के पांच प्रकाशनों का विमोचन हुआ। इनमें रिवर रिदम: लर्निंग बाय डूइंग मेथड्, एक्सपीरिएंशिया: ए बुक ऑन एक्सपेरिमेंटल लर्निंग- बियॉन्ड क्लासरूम्, ए फील्ड गाइड टू द टाइगर बीटल्स ऑफ रामगंगा कैचमेंट, स्टेटस ऑफ द क्लाउडेड लेपर्ड इन सेलेक्ट साइट्स ऑफ नॉर्थईस्टर्न इंडिया 2026 और पैन-इंडिया असेसमेंट ऑफ एंडेंजर्ड स्पीशीज - निकोबार मेगापोड शामिल हैं।