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सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा में उठाया जमरानी बांध का मुद्दा, राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की कही बात

Thu, 04 Jul 2019 10:23 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 04 Jul 2019 10:23 AM IST
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MP Ajay Bhatt demand jamrani dam as national project in loksabha 
सांसद अजय भट्ट - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

नैनीताल ऊधमसिंह नगर क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने जमरानी बांध परियोजना का मुद्दे को लोकसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास बजट की कमी है इसलिए इस बहुउद्देश्यीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए।

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अजय भट्ट ने तर्क दिया कि जमरानी बांध का निर्माण नहीं होने पर पेयजल के अभाव में तेजी से विकसित हो रहे भाबर की बसासत उजड़ जाएगी और उत्तर प्रदेश के लिए भी सिंचाई का संकट पैदा होगा। उन्होंने बांध निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत करने की मांग भी की।    
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44 वर्षों से जद्दोजेहद के बाद अंतत: इसी साल फरवरी में वित्तीय और पर्यावरण की मंजूरी मिली। अब परियोजना निर्माण के लिए वित्त का इंतजार है। जमरानी की स्वीकृत डीपीआर 2584.10 करोड़ रुपये की राशि केंद्र सरकार से मांगी गई है। सिंचाई अधिकारियों के अथक प्रयास के बाद इसी महीने चार फरवरी को केंद्रीय जल आयोग ने जमरानी बांध परियोजना की डीपीआर 2584.10 करोड़ (फाइनल कॉस्ट) को मंजूरी दे दी।
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परियोजना की मंजूरी में लंबा समय व्यतीत होने की प्रमुख वजह वन एवं पर्यावरण, डूब क्षेत्र, फ्लोरीफोना, यूपी और उत्तराखंड के बीच जल बंटवारा समेत करीब 14 आपत्तियां थीं। जिनकी अनापत्ति लेने में सिंचाई विभाग इतना अधिक समय लगा। अब बांध परियोजना की सभी बाधाएं दूर होने के बाद इसके निर्माण में बजट की कमी आड़े आ रही है। 

आपत्तियों में ही 43 साल बीत गए

वर्ष 1975 में इस परियोजना को सैद्धांतिक सहमति मिली। परियोजना के लिए तत्कालीन लागत 61.25 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इस परियोजना के तहत गौला बैराज, 244 किमी नहरों, जमरानी कॉलोनी का निर्माण किया गया। इसमें करीब 25.24 करोड़ रुपये खर्च हुए। तब से लगातार परियोजना पर कई आपत्तियां लगती रहीं। आपत्तियों का निस्तारण कराने में सिंचाई विभाग को 43 साल बीत गए।

जमरानी की सर्वे को धनराशि मंजूर
सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में बुधवार को देहरादून में हुई बैठक में जमरानी और बलियानाले का मामला छाया रहा। मुख्य अभियंता मोहन चंद्र पांडेय ने बताया कि प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभाग द्वारा बलियानाला संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों पर संतोष जताया गया। प्रमुख सचिव ने जमरानी बांध के सर्वे के लिए धनराशि की मंजूरी देते हुए कहा कि दो दिन में 50 लाख रुपये की राशि रिलीज कर दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि जमरानी और सौंग बांध को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कवायद तेज होने की वजह से इस परियोजना को प्रमुखता से लिया गया है। मुख्य अभियंता ने बताया कि एक महीने में विस्तृत डिजायन के साथ ही सर्वे रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

टम्टा ने संसद में उठाया नैनीसैनी से नियमित उड़ान का मुद्दा

अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के सांसद अजय टम्टा ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान नैनीसैनी हवाई पट्टी से नियमित उड़ान का मुद्दा उठाया। सांसद टम्टा ने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र पिथौरागढ़ में नैनीसैनी एयरपोर्ट का निर्माण हुआ है। यह एयरपोर्ट करीब 25 वर्ष से नियमित नागरिक उड़ान की बाट जोह रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम नागरिक योजना उड़ान-दो के तहत सीमांत वासियों के हवाई सेवा का उपहार दिया था।

17 जनवरी 2019 को  देहरादून-पिथौरागढ़-पंतनगर के लिए नियमित हवाई सेवा प्रारंभ हुई। उत्तराखंड सरकार से हुए अनुबंध के अनुसार एयर हेरिटेज कंपनी को इस रूट पर हवाई सेवा प्रारंभ करने का कार्य मिला। हवाई सेवा के शुरू होने से क्षेत्र में काफी हर्ष का वातावरण था और एडवांस में एक माह के टिकट बुक हो गए थे। उन्होंने कहा कि सेवा शुरू होने के बाद नौ फरवरी को जब विमान ने पंतनगर से पिथौरागढ़ की ओर उड़ान भरी तो उसका फाटक हवा में ही खुल गया। चालक दल की सूझबूझ से बड़ा हादसा होने से टल गया। सांसद टम्टा ने कहा कि तब से हेरिटेज कंपनी ने सेवाएं देनी बंद कर दीं। इससे सीमांत के लोगों में हवाई सेवा को लेकर निराशा और हताशा के भाव हैं। 

उन्होंने अनुरोध किया कि पूर्व की भांति देहरादून-पिथौरागढ़-पंतनगर हवाई सेवा अविलंब प्रारंभ करवाई जाए। कहा कि यदि हेरिटेज अपनी सेवाएं देने में असमर्थ होती है तो एअर इंडिया या अन्य प्रतिष्ठित विमान कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी दी जाए ताकि सीमांत क्षेत्र वासियों को भी उड़ान योजना का लाभ मिल सके।

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