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खूबसूरत छटाओं के बीच खाई में छिपे हैं मौत के मुहाने

Mon, 23 May 2022 12:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2022 12:45 AM IST
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Mouths of death are hidden in the gap between beautiful shades
पहाड़ों की रानी मसूरी के वैकल्पिक किमाड़ी मार्ग पर दोनों ओर खूबसूरत वादियां के बीच खाई में मौत के कई मुहाने छिपे हैं। कई बार जब यहां कोई हादसा होता है तो पता ही नहीं चलता कि वाहन किस जगह से खाई में गिरा है। हर साल छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं।
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यात्रा की दृष्टि से बेहद खतरनाक किमाड़ी मार्ग पर जब कोई हादसा होता है तभी यहां की सुरक्षा की परख की जाती है। तभी प्रशासनिक अमला दौड़ता है और क्रश बैरियर, पैराफिट, रोड साइन, मलबा प्रबंधन आदि की याद आती है। करीब डेढ़ साल से यहां कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ तो किसी की जुबान पर इस मार्ग का नाम नहीं आया। वर्ष 2020 में केवल चार महीनों में यहां तीन बड़े हादसे हुए थे। इनमें सात लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रशासनिक अमले ने तमाम दावे किए, लेकिन अब इन दावों की भी खबर रखने वाला कोई नहीं है।
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2020 के बड़े हादसे
चार जुलाई : मसूरी से लौटते हुए एक कार खाई में जा गिरी। इसमें चार लोग सवार थे। कई घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चला तो दो की लाश मिली और दो घायल अवस्था में थे।
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14 अक्तूबर : रात में मसूरी से लौटते वक्त पूर्व मंत्री के समधी और समधन की कार खाई में जा गिरी। कई घंटे तो यही पता नहीं चला कि उनकी कार है कहां। इसके बाद मोबाइल की लोकेशन के आधार पर खोज की गई तो दोनों के शव कार से बरामद हुए।
11 नवंबर : एक कार में तीन युवक सवार थे। मसूरी से लौटते वक्त कार सड़क से नीचे दूसरी सड़क पर जा गिरी। यहां से रातभर कोई नहीं गुजरा। दो की तो मौत सिर पर चोट लगने से हुई। तीसरा वहां पड़े-पड़े रात में ठंड से मर गया।
चार प्रमुख ब्लैक स्पॉट
मार्ग पर खतरे का आलम यह है कि यहां एक नहीं बल्कि चार घोषित ब्लैक स्पॉट हैं। दुर्घटना के लिहाज से बेहद खतरनाक इन स्थानों को दुरुस्त करने के लिए तमाम प्रयास करने के दावे भी किए लेकिन अभी तक इन्हें दुरुस्त नहीं किया गया। इनमें गजियावाला, किमाड़ी और हाथी पांव मार्ग शामिल है। इसके अलावा कई अघोषित ब्लैक स्पॉट भी हर साल बरसात के बाद बन जाते हैं।

नए साल से पहले होता है सर्वे
हर साल जैसे नए साल का जश्न होता है, वैसे ही इस मार्ग के सर्वे का नंबर भी आता है। मसूरी मुख्य मार्ग पर भीड़ बढ़ती है तो इसे वैकल्पिक मार्ग के तौर पर प्रचारित किया जाता है। प्रशासन लावलश्कर के साथ इस मार्ग पर निकलता है और जगह-जगह सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए जाते हैं। बड़ी संख्या में नया साल मनाने के लिए लोग इस मार्ग का प्रयोग करते हैं। नया साल का जश्न खत्म होने के बाद सब ठीक रहा तो यहां भी कोई प्रबंध नहीं किए जाते हैं।
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