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समय पर नहीं मिला इलाज, जच्चा की मौत
ब्यूरो / अमर उजाला, विकासनगर/त्यूनी
Updated Tue, 24 Nov 2015 01:41 PM IST
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सिस्टम की हीलाहवाली ने दूसरों की जिंदगी में खुशियां भरने वाली आशा कार्यकत्री की ही जान ले ली। सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण बच्चे को जन्म देने के महज कुछ घंटे के बाद आशा कार्यकत्री की मौत हो गई। हालांकि, बच्ची स्वस्थ है। जच्चा की मौत की वजह अधिक रक्त स्राव होना बताया जा रहा है।
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उजला देवी (22) पत्नी शूरवीर सिंह चौहान निवासी रजाणू-कोटी विकासखंड चकराता में आशा कार्यकत्री थी। बीते शनिवार सुबह उजला ने घर पर ही बच्ची को जन्म दिया, लेकिन अधिक रक्त स्राव के कारण जब महिला की हालत बिगड़ने लगी तो परिजनों ने नजदीक के कोटी स्थित सरकारी अस्पताल में संपर्क साधा।
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पता चला कि कोई डॉक्टर नहीं होने के कारण अस्पताल में ताला लटका है। ऐसे में परिजनों ने 40 किमी दूर सीएचसी चकराता से आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की मांग की। जब तक 108 एंबुलेंस गांव पहुंचती, महिला की मौत हो चुकी थी। परिजनों का कहना है कि यदि उजला को कोटी स्थित सरकारी अस्पताल में इलाज मिल जाता तो वह जीवित होती।
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अक्सर लटका रहता है ताला
कोटी स्थित सरकारी अस्पताल पर करीब 100 गांवों के लोग इलाज के लिए निर्भर हैं। अस्पताल में दो चिकित्सकों की तैनाती है, लेकिन नियमों को दरकिनार कर, जहां एक चिकित्सक को सीएचसी सहसपुर में अटैच किया गया है, वहीं दूसरी चिकित्सक अक्सर गायब रहती हैं। हादसे वाले दिन भी चिकित्सक अस्पताल से नदारद थीं।
ठेंगे पर मुख्यमंत्री के आदेश
सीएचसी सहसपुर में अटैच चिकित्सक की संबद्धता को समाप्त करने के लिए दो माह पूर्व स्वास्थ्य सचिव को मुख्यमंत्री स्तर से निर्देश जारी हो चुके हैं। लेकिन अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
पहले भी हुई मौत
पिछले माह नौ अक्तूबर को मलेथा के प्रधान केदियाराम की पत्नी गोरखी (30) की भी समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई थी। उसने मायके धारिया में बच्ची को जन्म दिया था। सीएचसी साहिया की एंबुलेंस कहीं और जाने के कारण तब भी चकराता से एंबुलेंस आने में देरी हुई थी।
आनन फानन में उसे सीएचसी साहिया ले जाया गया, जहां अधिक रक्त स्राव होने पर महिला की मौत हो गई थी। उस दौरान मलेथा से 29 किमी दूर स्थित पीएचसी पजिटिलानी में यदि डॉक्टर होता तो गोरखी की जान बच सकती थी। सीएचसी के डॉक्टरों का भी कहना था कि यदि गोरखी समय पर अस्पताल पहुंच जाती तो बच जाती।
डिप्टी सीएमओ से हादसे से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है। ड्यूटी से गायब रहने वाली चिकित्सक का वेतन रोका गया है। अटैचमेंट को भी निरस्त कर दिया गया है।
- डॉ. एसपी अग्रवाल सीएमओ