{"_id":"64dd26e926bae2582d0f76e8","slug":"most-of-the-wheelchairs-in-the-sub-district-hospital-are-in-vikas-nagar-news-c-5-1-drn1030-224303-2023-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: व्हीलचेयर के टायरों में रबर नहीं, तीमारदारों के छूट रहे पसीने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: व्हीलचेयर के टायरों में रबर नहीं, तीमारदारों के छूट रहे पसीने
विज्ञापन
विज्ञापन
व्हीलचेयर खराब, मरीज और तीमारदारों को होती है परेशानी
- अधिकांश के टायरों में रबर और फुट रेस्ट नहीं
- अस्पताल में होती है रोजाना 450-500 की ओपीडी
उप जिला अस्पताल की अधिकांश व्हीलचेयर बदहाल स्थिति में है। किसी के टायर में रबर नहीं तो किसी में पैर रखने के लिए फुट रेस्ट नहीं है। इसकी वजह से मरीजों को एक से दूसरे स्थान पर ले जाने में तीमारदारों के पसीने छूट जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी वरिष्ठ नागरिकों को उठानी पड़ती है। उन्हें व्हीलचेयर को खींचने के लिए दूसरों का मुंह ताकना पड़ता है।
उप जिला अस्पताल पछवादून और जौनसार बावर क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल हैं। यहां पड़ोसी राज्य हिमाचल के साथ ही पड़ोसी जिले उत्तरकाशी और टिहरी से बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां रोजाना 450-500 की ओपीडी होती है। इतना महत्वपूर्ण अस्पताल होने के बावजूद व्हीलचेयर खराब स्थिति में हैं। अधिकांश के टायरों की रबर उखड़ चुकी हैं। जिस कारण व्हीलचेयर सही तरीके से काम नहीं करती।
विज्ञापन
तीमारदार को व्हीलचेयर खींचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। फुट रेस्ट न होने से मरीजों को भी भारी असुविधा होती है। अपनी मरीज को इलाज के लिए लेकर पहुंचकर धर्म सिंह, चरणदास, सुरेंद्र कोठारी का कहना है कि व्यवस्थाओं में सुधार की बेहद जरूरत है।
विज्ञापन
सड़क पर रैंप नहीं
उप जिला अस्पताल में मुख्य सड़क की ऊंचाई अधिक है। यहां पर रैंप नहीं बनाया गया है। जिस कारण स्ट्रैचर और व्हीलचेयर पर बैठे मरीजों को खींचना मुश्किल हो जाता है। तीमारदारों को दूसरे लोगों की मदद लेनी पड़ती है।
बयान...
व्हीलचेयर की मरम्मत करने वाला कोई नहीं मिल रहा है। जल्द ही मरीजों की सुविधा को देखते हुए नई व्हीलचेयर की व्यवस्था कराई जाएगी। जिस जगह रैंप नहीं हैं, यदि वहां रैंप बनाया जाता है, तो जल भराव की समस्या उत्पन्न हो जाएगा। सड़क फिर से बननी है, तब निकासी के लिए पाइप डालने के साथ ही रैंप बनाया जाएगा। - डॉ. विजय सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी