उत्तराखंड: बम निरोधक दस्ते ने की मोर्टार शेल की जांच, क्षेत्र में चल रही है सघन चेकिंग
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बनबसा में मिले मोर्टार शेल की जांच और शेल मिलने वाले स्थान के निरीक्षण को शनिवार की देर शाम ऊधमसिंह नगर जिले से आए बम निरोधक दस्ते (बम डिस्पोजल एस्कॉर्ट) ने जांच शुरू की। बम निरोधक दस्ते के प्रभारी विजय शंकर यादव के नेतृत्व में यहां पहुंची टीम ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां मोर्टार शेल मिला था। टीम के साथ बनबसा पुलिस के अलावा चंपावत की क्यूआरटी टीम भी शामिल थी। कार्यवाहक थानाध्यक्ष देवेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि बीडीएस की टीम अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेगी।
सुरक्षित रखा गया है मोर्टार शेल
मोर्टार शेल के पाए जाने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। मोर्टार शेल कहां से आया और कौन इसे लेकर आया है यह जांच का विषय बन गया है। भारत-नेपाल की संवेदनशील सीमा पर मोर्टार शेल का पाया जाना क्षेत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। फिलहाल पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच शेल को गड्ढे में सुरक्षित रखा है। शुक्रवार को देशी फार्म स्थित रेलवे क्रासिंग के पास झाड़ी में एक कबाड़ी को मोर्टार शेल मिला था। सूचना पर पुलिस ने मोर्टार शेल को कब्जे में ले लिया था। क्षेत्र में स्थित सेना समेत सभी खुफिया एजेंसियों ने इस संबंध में पूछताछ और जांच की। पुलिस ने शेल को सुरक्षित गड्ढे में रखा है। कार्यवाहक थानाध्यक्ष देवेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि पुलिस के उच्चाधिकारियों और सेना के अधिकारियों को इसकी जांच और डिफ्यूज करने के संबंध में लिखा गया है। सेना के अभियांत्रिकी विभाग के एक्सपर्ट ही मोर्टार शेल के बारे में सही जानकारी दे पाएंगे। एसपी धीरेंद्र सिंह गुंज्याल ने अपने मातहतों को इस संबंध में जांच कर तह तक जाने के निर्देश दिए हैं।
बनबसा में नहीं है मोर्टार की फायरिंग रेंज
एक्सपर्ट की मानें तो बनबसा स्थित सेना छावनी की फायरिंग रेंज (चांदमारी मैदान) छोटी है। इसमें मोर्टार फायर करने की सुविधा नहीं है। यहां स्थित फायरिंग रेंज केवल राइफलों के लिए है, जिसमें थ्री नाट थ्री, एके 47, इनसांस और एसाल्ट के अलावा कार्बाइन से ही फायरिंग का अभ्यास किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि यहां बीते दिवस मिला मोर्टार शेल कहीं बाहर से ही लाया गया होगा।
दस वर्ग फुट है मोर्टार शेल की मारक क्षमता
गौरव सेनानी कल्याण समिति अध्यक्ष कै. भानी चंद और सेवानिवृत्त कै. विरेंद्र रजवार ने बताया कि 81 एमएम मोर्टार शेल अगर एक्टिव है तो काफी खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बताया कि ट्राइपौड पर गन को रख इस शेल को फायर किया जाता है। इसकी मारक क्षमता करीब दस वर्ग फुट होती है। इसके छर्रे करीब सौ वर्ग फुट तक पहुंचते हैं। इस मोर्टार शेल का वजन कम से कम चार से पांच किलो तक होता है।
कहीं चलती ट्रेन से न फेंका गया शेल
मोर्टार शेल और पाक सीमा पर चल रही गतिविधियों के बाद एसपी धीरेंद्र सिंह गुंज्याल ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भारत-नेपाल सीमा के अलावा क्षेत्र की सघन चेकिंग के निर्देश दिए हैं। पुलिस, सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया तंत्रों द्वारा क्षेत्र ओर भारत-नेपाल सीमा पर पैनी नजर रखने के अलावा चेकिंग और सतर्कता बरती जा रही है। कार्यवाहक थानाध्यक्ष देवेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि भारत नेपाल सीमा के अलावा शारदा बैराज चौकी, ऊधम सिंह नगर जिले की जगबूड़़ा पुल और मझगांव से लगी सीमा पर भी निगरानी की जा रही है। उधर, एसएसबी की 57 वीं वाहनी की ए और इ कंपनियों के जवानों द्वारा भारत -नेपाल सीमा पर सघन पेट्रोलिंग के साथ चेकिंग की जा रही है।