पीड़िता को फंसा सकती है उत्तराखंड पुलिस

मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 26 Nov 2013 09:33 AM IST
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molestation case against additional secretary

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अपर सचिव यौन शोषण मामले में दून पुलिस के सामने अब अपनी प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती है।
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पीड़ित युवती का भरोसा वह पहले ही खो चुकी है। दिल्ली के बाद दून में केस दर्ज होने के बाद यदि मामले में पुलिस ने
निष्पक्ष और तेजी से जांच नहीं की तो उसकी शाख पर कालिक पुत जाएगी। हालांकि इस केस को हैंडल करना पुलिस के लिए आसान नहीं है।
अधिकारियों का दबाव झेलना पड़ सकता है
सियासत से लेकर शासन और प्रशासन के अधिकारियों तक का दबाव उसे झेलना पड़ सकता है। यही वजह है कि पीड़िता उस पर पक्षपात का आरोप पहले ही लगा चुकी है। पीड़िता को आशंका है कि उत्तराखंड पुलिस दबाव में उसे फंसा सकती है।

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युवती ने अपर सचिव से जान का खतरा भी बताया है। सूत्रों की मानें तो युवती उत्तराखंड पुलिस पर भरोसा न होने को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट से जांच दूसरे राज्य के लिए ट्रांसफर करने की गुहार लगा सकती है।

दून पुलिस ने दिल्ली से ट्रांसफर जीरो एफआईआर पर अपर सचिव जोशी के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया है लेकिन जांच के संदर्भ में उस पर दबाव साफ देखा जा सकता है। तहरीर में दर्ज नाम और तथ्यों के संबंध में पुलिस अधिकारियों के गोलमोल बयान इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

युवती ने यह भी शिकायत की है कि जब उसने दून केस दर्ज कराना चाहा तो उसे एसपी देहात और कुछ पुलिस अधिकारियों ने डराने-धमकाने की कोशिश की। यही कारण रहा कि उसने दिल्ली में केस दर्ज कराया। यह भी आरोप है कि अपर सचिव ने भी युवती को डराया धमकाया।

उत्तराखंड पुलिस दबाव में

जिस तरह से जोशी ने युवती के खिलाफ बसंत बिहार थाने में मामला दर्ज कराया और पुलिस ने उस पर कार्रवाई की उससे भी यही संकेत जाता है कि पुलिस दबाव में है। नैनीताल पुलिस ऑफिसर्स क्लब में जिस कमरे में युवती से दुराचार करने का आरोप लगाया जा रहा है उसे एक बड़े अधिकारी के नाम पर बुक कराया गया था।

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ऐसे में अपर सचिव और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पुलिस कितना निष्पक्ष जांच करती है, इस पर पीड़िता को संदेह होना स्वाभाविक है।

धाराओं में भी खेल कर गई पुलिस

युवती की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने में भी पुलिस खेल कर गई। दिल्ली पुलिस को दी गई तहरीर में युवती ने जेपी जोशी पर नौकरी का झांसा देकर दुराचार करने, अश्लील वीडियो बनाने, देहरादून के एसपी देहात जगदीश भंडारी व अन्य द्वारा मोबाइल पर धमकी देने और कांग्रेस नेता रितु के जोशी से संपर्क न बिगाड़ने जैसे तथ्यों को दर्शाने के बावजूद पुलिस ने सिर्फ जेपी जोशी पर ही मुकदमा दर्ज किया है।

अधिवक्ता संजीव शर्मा के मुताबिक, इस तहरीर पर जेपी जोशी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट का मुकदमा भी बनता है।

इसी तरह, रितु पर षडयंत्र में शामिल होने और एसपी देहात जेएस भंडारी व अन्य पर डराने-धमकाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए था। युवती का बयान लेने के बाद दून पुलिस मुकदमे में इन धाराओं को जोड़ सकती है।

क्या कर रही दून पुलिस

- युवती के बयान लेने की कोशिश में
- एक टीम दिल्ली और दूसरी जाएगी नैनीताल
- युवती द्वारा बताए गए घटनास्थलों की होगी फोरेंसिक जांच, होटलकर्मियों से भी पूछताछ
- अपर सचिव जोशी, रितु कंडियाल, पीड़ित युवती, एसपी देहात और जोशी को ब्लैकमेल करने वाले आरोपियों के मोबाइल कॉल की निकलेगी डिटेल
- किस अफसर ने कराया था नैनीताल में कमरा बुक

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