नमो के 'करंट' से कोमा में पहुंची कांग्रेस
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मतगणना से पहले तक कांग्रेस सपने में भी नहीं सोच रही थी कि इतनी करारी हार होगी। इसी तरह भाजपा ने भी नहीं सोचा था कि इतने अंतर से जीत होगी। भाजपा की सबसे बड़ी सफलता ने कांग्रेस को सबसे खराब हालत में पहुंचा दिया है।
राज्य गठन के बाद से अभी तक की सबसे बड़ी जीत भाजपा ने 2014 में ही दर्ज की। भाजपा का यह प्रदर्शन विधानसभा 2012 से भी बेहतर है।
कांग्रेस भले ही नकारे पर इतना जरूर है कि उत्तराखंड में मोदी के अंडरकरंट को मतदाताओं ने महसूस किया। मतप्रतिशत के लिहाज से भाजपा को सबसे बड़ी सफलता पौड़ी गढ़वाल संसदीय सीट पर मिली है।
राज्य गठन के बाद टूटे सभी रिकॉर्ड
2009 में कांग्रेस पांचों संसदीय सीटों पर कब्जा करने में सफल रही थी पर उस समय भी भाजपा के प्रत्याशियों की हार का अंतर अधिक नहीं था। पर 2014 में मतपरिणाम ऐसा आया है जिसमें भाजपा और कांग्रेस खुद में हैरान हुई।
कांग्रेस के लिए हर सीट पर हार जबरदस्त रही। जमानत बच गई यह गनीमत रही। दूसरी ओर भाजपा ने राज्य गठन के बाद से पांचों सीटों पर अब तक के रिकार्ड भी तोड़ डाले।
खंडूड़ी को मिली 'सबसे बड़ी' जीत
मतप्रतिशत के अंतर के हिसाब से देंखे तो गढ़वाल सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी की सबसे बड़ी जीत है। भाजपा ने इस सीट पर 59.48 वोट हासिल किए जबकि कांग्रेस को केवल 32.43 प्रतिशत वोट ही मिल पाए।
इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस में हार-जीत का अंतर 27.05 प्रतिशत रहा। अन्य सीटों की तुलना में यह सबसे अधिक है। दूसरे नंबर पर नैनीताल की सीट है।
इन दोनो ही सीटों पर अब तक के दोनों संसदीय चुनावों में कांग्रेस या भाजपा कभी इतने अंतर से नहीं हार जीत नहीं मिली।
भाजपा-कांग्रेस को छोड़ सबकी जमानत जब्त
हाल यह रहा कि कांग्रेस-भाजपा को छोड़कर किसी भी सीट पर कोई भी दल या प्रत्याशी जमानत जब्त होने से नहीं बचा पाया। जाहिर है कि कांग्रेस और भाजपा के अलावा किसी भी अन्य दल या प्रत्याशी पर मतदाताओं ने यकीन नहीं किया।
मत परिणाम यह भी बता रहा है कि कांग्रेस का कोई दावा काम नहीं कर पाया। कांग्रेस ने नेतृत्व परिवर्तन कर बदलाव से न हिचकने और विकास और सरकार के काम पर फोकस किया था। इसके जवाब में भाजपा मोदी की लहर पर सवार रही।
हार का इतना ज्यादा अंतर बता रहा है कि इस बार भी मतदाताओं ने पांचों सीटों पर बदलाव कर यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड का मतदाता केंद्र में शायद मिलीजुली सरकार पंसद नही कर रहा है। 2009 में भी मतदाताओं ने एकतरफा ही वोट किया था। इस बार पोलिंग प्रतिशत भी अधिक रहा और हार जीत का अंतर भी।
भाजपा और कांग्रेस का मतप्रतिशत अंतर
भाजपा ने सभी सीटों पर भारी अंतर से कांग्रेस पर जीत हासिल की। जानिए कहां पर कितना रहा भाजपा कांग्रेस में जीत का अंतर।
गढ़वाल-27.05
नैनीताल-25.86
टिहरी-19.80
हरिद्वार-15.12
अल्मोड़ा-14.84