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आपदाः इंसानों के बाद अब लापता पौधों की तलाश

Wed, 06 Nov 2013 11:59 AM IST
रजा शास्त्री, अमर उजाला/ देहरादून
रजा शास्त्री, अमर उजाला/ देहरादून Updated Wed, 06 Nov 2013 11:59 AM IST
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missing humans and plants

पहाड़ों पर आए जल प्रलय में गुम हुए इंसानों की तलाश के बाद अब आपदा में लापता हुईं पौधों, पेड़ों, जड़ी-बूटियों और घास की खोजबीन की जा रही है।

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कृषि विज्ञानियों की टीमों ने आपदाग्रस्त क्षेत्रों में इनकी खोजबीन शुरु कर दी है। जो वनस्पतियां गुम हैं उनके जीन इकट्ठे करके सुरक्षित किए जा रहे हैं जिससे उन्हें फिर विकसित किया जा सके।
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मिट्टी को खतरा
लुप्तप्राय वनस्पतियों की श्रेणी में पहाड़ों पर पैदा होने वाली गेहूं और धान की कुछ स्थानीय प्रजातियां भी हैं। मिट्टी बह जाने से इनके अस्तित्व को भी खतरा पैदा हो गया है।

गेहूं और धान की इन प्रजातियों के जीन को भी संरक्षित किया जा रहा है। आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में स्थिति सामान्य होने के बाद विज्ञानी एकत्र किए गए जीन की मदद से फसलों को नए सिरे से विकसित करेंगे।

वनस्पतियों को ढूंढने का काम शुरू
आपदा में गायब हुईं वनस्पतियों को ढूंढने के इस अभियान का नोडल प्रभारी केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. जीपी जुयाल को बनाया गया है।


डॉ. जुयाल ने बताया कि इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विज्ञानियों की टीमें गठित कर दी गई हैं। टीमों ने रुद्र प्रयाग, हरिद्वार, पिथौरागढ़ आदि क्षेत्रों में पहुंचकर अपना काम शुरु कर दिया है।

जड़ी-बूटियों पर खतरा
आपदा से लुप्तप्राय प्रजातियों के जीन को भवाली स्थित प्लांट्स जेनेटिक सेंटर में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि बहुत सी जड़ी-बूटियों पर खतरा हो सकता है। भीमल तथा चारे की अन्य प्रजातियां भी खतरे में आ सकती हैं। इसकी पूरी फेहरिस्त तैयार की जा रही है।

टीमों का अभियान पूरा होने के बाद इसकी रिपोर्ट केंद्र और प्रदेश सरकार को देंगे। इसके बाद इन प्रजातियों को फिर से विकसित करने का कार्य शुरु कर दिया जाएगा। बचे हुए पौधों के टुकड़ों तथा मिट्टी में मिले इसके अंश से जीन इकट्ठे किए जा रहे हैं।

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