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लोगों के साथ मंत्रीजी भी गुम बच्चे को खोजने में जुटे, बच्चा जिस हाल में मिला मां उससे लिपट पड़ी

Sun, 20 May 2018 09:37 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Sun, 20 May 2018 09:37 AM IST
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missing child found home in this condition
leopard

अल्मोड़ा में कोसी कस्बा निवासी सोनू टेलर के चार साल का बच्चा बृहस्पतिवार रात अचानक गायब हो गया था। तेंदुए के हमले की आशंका में कोहराम मचा रहा। इसलिए उसे खोजने लिए 12 बजे रात तक एसडीएम और अन्य अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस, एनडीआरएफ, वन विभाग की टीमों समेत करीब 300 से अधिक ग्रामीणों ने घंटों कटारमल क्षेत्र के जंगलों को छान मारा।

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अल्मोड़ा से लौट रहे केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा भी रात में ग्रामीणों के साथ बच्चे को खोजने जंगल में निकल गए। आखिरकार, रात करीब 12 बजे लापता बच्चे के बहन की नजर दरवाजे की पीछे गई तो बच्चा वहां बेसुध सोया मिला। बच्चे के जीवित बचे होने की उम्मीद खो चुकी मां ने जैसे ही बच्चे को देखा वह उससे लिपट पड़ी और दुख के आंसू खुशी में बदल गए।  
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बृहस्पतिवार की रात करीब पौने आठ बजे निकटवर्ती कोसी बाजार के निकट रहने वाले सोनू टेलर का चार साल का बेटा भावेश खाना खाने के बाद अचानक गायब हो गया। काफी देर तक बच्चा घर पर नजर नहीं आया तो परिजनों ने उसे घर के आसपास खोजना शुरू किया, लेकिन कुछ पता नहीं लगा। कुछ ही देर में घर में परिजनों का रोना-धोना शुरू हो गया। लोगों को आशंका हुई कि तेंदुआ ही बच्चे को उठा ले गया है। कुछ ही देर में आसपास के ग्रामीण भी एकत्र हो गए। घटना की सूचना प्रशासन को दे दी गई। कुछ देर बाद पुलिस, वन विभाग, एनडीआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं।

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बच्चा ढूंढने निकले लोगों को तेंदुआ घूमता मिला  

missing child found home in this condition
तेंदुआ - फोटो : amar ujala
रात में बच्चे को जंगल की तरफ खोजने निकले ग्रामीणों और अन्य लोगों को कोसी से कुछ दूर दौलाघट मार्ग में एक तेंदुआ भी दिखाई दिया। लोगों की भीड़ देखकर तेंदुआ नदी को पार करता हुआ भाग निकला। इस बीच यह तेंदुआ वहां से गुजर रहे एक ट्रक के सामने से भी निकला। पास में तेंदुआ नजर आने के बाद बच्चे को तेंदुए द्वारा उठाए जाने का शक और पुख्ता हो गया था। 

एसडीएम विवेक राय, आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव सहित वन विभाग और पुलिस प्रशासन के कई अधिकारियों के नेतृत्व में कटारमल के आसपास करीब तीन किमी क्षेत्र के जंगलों में लोग बच्चे को घंटों तलाशते रहे। आसपास के गांवों के करीब 300 से अधिक ग्रामीण भी बच्चे को खोजने में जुटे रहे लेकिन कुछ पता नहीं लगा। इस बीच रात करीब 12 बजे भावेश की बहन की नजर दरवाजे के पीछे गई तो भावेश वहां गहरी नींद में सोया था। उसे हिलाकर जगाया तब उसने आंखें खोली। भावेश की मां तुरंत उससे गले लिपट गई। कुछ देर पहले चिल्ला कर रो रही मां के आंखों में अब खुशी के आंसू थे।  

जानकारी के मुताबिक दरवाजा खोलने पर दीवार और दरवाजे के बीच के स्थान पर कुछ जगह थी। यह माना जा रहा है कि भोजन करने के बाद भावेश खेलते हुए दरवाजे के पीछे चला गया और उसने दरवाजा अपनी तरफ खींच लिया। इससे वह किसी को नजर नहीं आ रहा था। फिर कुछ देर बाद उसे वहीं नींद आ गई। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि दरवाजे और दीवार के बीच में भावेश लधार लेकर लगभग खड़े-खड़े सोया था। उसे इतनी गहरी नींद आई थी कि उसे कमरे के भीतर जोर-जोर से रोने की आवाज भी नहीं जगा सकी।
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