निकाय चुनाव 2018: चुनाव प्रचार में सरकारी वाहन का प्रयोग नहीं कर सकेंगे मंत्री, सुरक्षा रहेगी बरकरार
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नगर निकाय चुनाव में प्रचार के दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री सरकारी वाहन का उपयोग नहीं कर सकेंगे। अलबत्ता प्रचार के दौरान मंत्रियों और विधायकों को मिली सुरक्षा बरकरार रहेगी। पुलिस मुख्यालय ने पुलिस कप्तानों को आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराने को कहा है। यदि आचार संहिता उल्लंघन का मामला बनता तो तत्काल मुकदमा दर्ज करने का निर्देश भी आयोग ने दिया है।
निकाय चुनाव में भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और यूकेडी आदि के प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। देहरादून नगर निगम से भाजपा से मेयर पद पर सुनील उनियाल गामा के चुनाव लड़ने के कारण मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की प्रतिष्ठा भी सीधे तौर पर जुड़ी है, क्योंकि गामा उनकी पहली पसंद रहे हैं।
इसी लिहाज से मंत्रियों के अलावा क्षेत्रीय विधायकों की चुनाव में जीत सुनिश्चित कराने को जिम्मेदारी तय की गई है। ऐसे में विपक्ष को आशंका है कि चुनाव में सत्ता का दुरुपयोग हो सकता है।
इसी के मद्देनजर चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए आचार संहिता का सख्ती से पालन कराने की मांग विपक्षी दल उठा रहे हैं। पुलिस ने चुनाव के मद्देनजर मंत्रियों और विधायकों की सुरक्षा आदि को लेकर निर्वाचन आयोग से दिशा-निर्देश मांगे थे।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार चुनाव प्रचार के दौरान मंत्री सरकारी वाहन का उपयोग नहीं कर सकेंगे। गृह जनपद में भ्रमण के दौरान कोई प्रत्याशी उनकी कार में नहीं बैठा होना चाहिए।
अन्यथा इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। उन्हाेंने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान मंत्रियों और विधायकों को दी गई सुरक्षा बरकरार रहेगी। पुलिस कप्तानों को निकाय चुनाव में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी प्रकार से आचार संहिता का उल्लंघन नहीं होने पाए।