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मिनिस्ट्रीयल कर्मियों के हड़ताल पर सीएम का पारा गरम

Mon, 15 Sep 2014 09:31 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 15 Sep 2014 09:31 PM IST
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ministerial employee strike in uttarakhand

प्रदेश भर में शुरू हुई मिनिस्ट्रीयल कर्मियों की हड़ताल पर शासन में पहले दिन कोई हलचल नहीं दिखी। हड़तालियों की दो प्रमुख मांगें हैं।

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इनमें से कलक्ट्रेट के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लेकिन ना.तहसीलदार केपदों पर दस प्रतिशत पदोन्नति कोटा तय करने वाली मांग को लेकर सरकार में अभी तक निर्णय की स्थिति नहीं बनी है।
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सबसे मुश्किल काम मिनिस्ट्रीयल कर्मियों को ना. तहसीलदार के पदों पर दस प्रतिशत कोटा देने की है। जैसे ही कैबिनेट ने पिछले दिनों इस मांग को मंजूर किया तो शासनादेश होने से पहले ही पटवारियों ने हड़ताल शुरू कर दी।
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दबाव में नहीं आऊंगाः हरीश रावत
मैं दबाव में नहीं आऊंगा। अब हड़ताल से प्रदेश का गुजारा नहीं होने वाला है। मैं खुद कर्मचारी नेता रहा हूं उनके बीच काम किया है। कर्मचारियों की सभी जायज मांगे ही मानी जाएंगी। राज्य की आर्थिक स्थिति सबके सामने है। जिनके लिए राज्य बना है उन तक अभी कुछ नहीं पहुंच रहा है। उन तक उनका हक पहुंचे राज्य के हित में सबकी जिम्मेदारी है।

मिनिस्ट्रीयल कर्मी हड़ताल पर

ministerial employee strike in uttarakhand

मिनिस्ट्रीयल कर्मियों को पदोन्नति कोटा देने के लिए शासनादेश जारी करने की तैयारी थी लेकिन सरकार ने हाथ रोक लिए। अब यह मुद्दा सरकार के लिए मुसीबत बन गया है। मिनिस्ट्रीयल कर्मियों की यह मांग पूरी करने के विरोध में पटवारी हड़ताल पर चले गए। और अब नहीं माने जाने के विरोध में मिनिस्ट्रीयल कर्मी हड़ताल पर है।

यह ऐसा मुद्दा बन गया है कि जिसके होने या नहीं होने पर एक वर्ग हड़ताल पर जरूर जाएगा। फिलहाल दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत करने जैसी कोई चर्चा अभी सुनने को नहीं मिली है।

दूसरा बड़ा मुद्दा कलक्ट्रेट के पुनर्गठन का है। यह मांग पूरी हो सकती है लेकिन इसमें अभी समय लगेगा। राजस्व परिषद ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट पिछले महीने की सरकार को सौंप दी है। शासन स्तर पर राजस्व परिषद की रिपोर्ट को लेकर परीक्षण भी शुरू हो गया है। लेकिन राजस्व विभाग से जुड़े अफसरों की माने तो इस प्रक्रिया के पूरा होने में अभी भी महीने भर का समय लग सकता है।

इसलिए पूरी नहीं हो सकती मांग

ministerial employee strike in uttarakhand

राजस्व प्रशिक्षित कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद जगूड़ी ने कहा कि मिनिस्ट्रीयल कर्मियों की यह मांग पूरी तरह से नाजायज है। उन्होंने कारण गिनाते हुए कहा कि मिनिस्ट्रीयल कर्मियों के कुल 391 पद हैं।

इन कर्मियों को अपने कैरियर में छह पदोन्नति मिलती है और अलग अलग ग्रेड-पे में पदोन्नति के लगभग 750 हैं। इनकी शैक्षिक योग्यता भी 12वीं पास है।

दूसरी तरफ, पटवारी/लेखपालों के 1700 पद हैं और पदोन्नति के150 पद हैं। इसके अलावा शैक्षिक योग्यता भी स्नातक है। 60 पद नायब तहसीलदार केऔर 40 तहसीलदार केहैं। मूल पदों की संख्या ज्यादा है और पदोन्नति के पद कम हैं।

इसके अलावा भी राजस्व कर्मियों को पटवारी की एक साल, पुलिस की छह महीने, ना. तहसीलदार की एक महीने की ट्रेनिंग होती है। जबकि मिनिस्ट्रीयल संवर्ग की कोई ऐसी ट्रेनिंग नहीं होती। इसलिए ना.तहसीलदार के पदों को मिनिस्ट्रीयल कर्मियों को दिया जाना अवैधानिक है। और, यदि फिर भी ऐसा हुआ तो लेखपाल संघ, पटवारी महासंघ और रजिस्ट्रार कानूनगो संघ हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे।

आउटसोर्सिंग कर्मियों को कैसे मिले लाभ

ministerial employee strike in uttarakhand

आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे जाने वाले उपनल कर्मचारियों की मांगे पूरी करना आसान नहीं है। आंदोलनरत कर्मचारी संविदा या दैनिक वेतन भोगी बनने की मांग कर रहे हैं। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती में आरक्षण नियमावली का अनुसरण नहीं होता है।

आंदोलनरत कर्मियों की दूसरी मांग यह है कि निकाले गए कर्मचारियों को दोबारा रखा जाए, लेकिन आउटसोर्सिंग पर होने वाली तैनाती में यह शर्त अनुमन्य नहीं है।

उपनल की नियुक्ति पूरी तरह संबंधित विभाग (प्रिंसिपल इम्पलायर ) की मांग पर निर्भर करती है, जिसकी सेवा शर्तों में साफ होता है कि उनको क्या लाभ मिलने हैं और उनकी सेवाएं पूरी तरह से अस्थाई हैं। तीन सप्ताह से आंदोलन कर रहे उपनल कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए अभी शासन स्तर पर कोई कसरत नहीं शुरू हुई है। ऐसे में सरकार को नए सिरे से व्यवस्था बनानी होगी।

चुनावी वादे अब पड़ रहे भारी
राज्य सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा की थी, जिसके तहत उपनल कर्मचारियों को संविदा में किये जाना था। उपनल का मामला जब कैबिनेट में आया था, तो दो मंत्रियों ने उपनल कर्मियों की भर्तियों में आरक्षण नियमावली का अनुसरण नहीं होने के चलते भारी विरोध जताया था। इसके बाद प्रस्ताव लटक गया।

वेतन वृद्धि का प्रस्ताव भी लटका
उपनल कर्मियों की 10 से 15 फीसदी वेतन वृद्धि का प्रस्ताव फरवरी 2014 से लटका हुआ है। आउटसोर्सिंग पर रखे कर्मचारियों को संविदा के समान वेतन लाभ देने का सरकार ने फैसला तो लिया, लेकिन उसपर कैबिनेट की मुहर नहीं लगी। इसके बाद उनकी वेतन वृद्धि की घोषणा तो हुई लेकिन प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं आया।

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