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उत्तराखंड में लोकायुक्त नहीं बना, कम से कम गुड गवर्नेंस तो दिखे
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 31 Aug 2016 10:59 AM IST
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हरीश रावत
- फोटो : Self
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लोकायुक्त पर लंबी कवायद के बावजूद राजभवन से फाइल वापसी के बाद अब गुड गवर्नेंस की बात उठी है।
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राज्य मंत्रिमंडल के कुछ प्रमुख सदस्यों ने बीती रात मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर लंबी चर्चा की। अफसरों की मनमानी रोकने के अलावा जिलों में पुलिस-प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर अच्छी छवि के अफसरों की तैनाती की बात भी हुई।
गौरतलब है कि लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार लंबे अरसे से कवायद में जुटी थी। आखिर में जस्टिस जेसीएस रावत के नाम पर सहमति बनाते हुए उन्हें लोकायुक्त बनाने के लिए फाइल राज्यपाल के पास भेज दी गई। मगर इस पूरी प्रक्रिया में नियम-कानून का पालन न होने और पारदर्शिता के अभाव में फाइल राजभवन से वापस आ गई।
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राज्यपाल ने नियम-कानून को ध्यान में रखने की हिदायत देते हुए फिर से पूरी प्रक्रिया करने के निर्देश भी दिए। इस मामले में हुई फजीहत को देखते हुए अब राज्य में गुड गवर्नेंस की बात सरकार के मंत्रियों के बीच होने लगी है।
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सूत्रों के मुताबिक सोमवार की रात बीजापुर हाउस में मुख्यमंत्री को राज्य के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने जिलों में अच्छी छवि के अफसरों की तैनाती का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर तमाम जिलाधिकारियों और पुलिस अफसरों की शिकायतें आ रही हैं।
आम जनता इनकी कार्यप्रणाली से खुश नहीं है। चुनाव सिर पर होने की बात कहते हुए इस स्थिति पर तत्काल नियंत्रण करने की सलाह भी दी।
राज्य सरकार नहीं चाहती थी लोकायुक्त
राज्य युवा कल्याण परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रवींद्र जुगरान ने मुख्यमंत्री पर लोकायुक्त की नियुक्ति के नाम पर मात्र दिखावा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार भ्रष्टाचार से घिरी हुई है। ऐसे में सोचे-समझे तरीके से लोकायुक्त की फाइल में तमाम तकनीकी खामियां बरकरार रखी गईं।
जुगरान ने कहा कि लोकायुक्त अधिनियम 2014 की धारा-4 (उपधारा-5) के अनुसार लोकायुक्त एवं सदस्यों की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी किस रीति के तहत नामों के पैनल की संस्तुति करेगी। राज्य सरकार को इसके लिए नियम बनाने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अधिनियम की धारा-60 में यह भी कहा गया है कि नियम एवं विनियम बनाने के बाद इसे विधानसभा सत्र में रखा जाएगा, मगर ऐसा भी नहीं किया गया।
पार्टी ने नैतिकता के आधार पर मांगा मुख्यमंत्री से इस्तीफा
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि लोकायुक्त के चयन को लेकर प्रदेश सरकार की नीति और नीयत साफ नहीं थी। प्रदेश सरकार ने नेता प्रतिपक्ष से चयन प्रक्रिया के कई तथ्यों को छुपाया था, जिसको लेकर भाजपा ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। राज्यपाल ने जिस टिप्पणी के साथ लोकायुक्त की फाइल लौटाई है उसको देखते हुए सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस बात के लिए राज्यपाल का शुक्रिया अदा करती है कि उन्होंने विपक्ष की आपत्तियों को गंभीरता से लिया।
चौहान मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकायुक्त के लिए कोई नियमावली नहीं बनाई गई है। इसके लिए जो सर्च कमेटी बनाई गई थी उसमें शामिल कई लोगों पर गंभीर आरोप हैं। सीबीआई भी उनके खिलाफ टिप्पणी कर चुकी है।
सर्च कमेटी ने जिस व्यक्ति को सर्च किया उसकी छवि भी दागदार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बड़ी चतुराई से इस बात की कोशिश की थी कि लोकायुक्त जैसी संस्था में अपनों को बैठा दिया जाए। राज्यपाल ने इस टिप्पणी के साथ लोकायुक्त की फाइल लौटाई है कि इसमें पारदर्शिता का अभाव है और लोकायुक्त के चयन के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं। इस टिप्पणी के बाद तो मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।