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हड़ताली संविदा कर्मियों ने स्वास्थ्य मंत्री को घेरा

Tue, 05 Jul 2016 10:14 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 05 Jul 2016 10:14 AM IST
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Minister of Health Hoop by striking contract workers
contract workers strike - फोटो : amar ujala

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के हड़ताली उपनल संविदा कर्मियों ने सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का घेराव किया। उन्होंने मंगलवार को भी हड़ताली जारी रखने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के सुव्यवस्थित संचालन के लिए अपर सचिव, डीजी हेल्थ और प्राचार्य की समन्वय समिति गठित की है।

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दून अस्पताल में सोमवार को भी उपनल के संविदा कर्मियों का आंदोलन जारी रहा। हालांकि, पंजीकरण और पैथोलॉजी खुली रही। अस्पताल प्रबंधन ने स्थायी और मेडिकल कॉलेज कर्मियों की ड्यूटी लगाई थी। उन्होंने मरीजों के ओपीडी के मैनुअल पर्चे बनाए। ओपीडी और लैब खुली होने से मरीजों को खासी राहत मिली। हड़ताल की वजह से कम ही मरीज अस्पताल पहुंचे, जिससे स्थिति ज्यादा खराब नहीं हुई। आमतौर पर सोमवार को अस्पताल में भीड़ ज्यादा रहती है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, अपर सचिव नीरज खैरवाल और स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. कुसुम नरियाल ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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प्रशासनिक अस्पताल में अधिकारियों की बैठक ले रहे स्वास्थ्य मंत्री का उपनल कर्मियों ने घेराव किया। स्वास्थ्य मंत्री ने हंसकर कर्मियों की बात टालने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारी भड़क उठे और जमकर खरी-खोरी सुनाई। बाद में स्वास्थ्य मंत्री ने किसी तरह अपनी जान छुड़ाई और कर्मियों से वार्ता का आश्वासन दिया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज का भाग होने के बावजूद जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं यथावत रहेंगी।
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मेडिकल कॉलेज अस्पताल का निर्माण पटेलनगर में होगा और दून वापस जिला अस्पताल बनेगा। अस्पताल के संचालन में किसी तरह की दिक्कत ना हो इसके लिए अपर सचिव, डीजी हेल्थ और प्राचार्य की समन्वय समिति बनाई गई है। इस समिति की प्रमुख सचिव प्रत्येक सप्ताह बैठक लेंगे। दवाओं की व्यवस्थाएं पुराने तरीके से ही होगी।

उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज से मरीजों को रेफर करने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो यह बेहद शर्मनाक होगा। कुछ इंटर्न डॉक्टरों के मरीजों से पैसे लेने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

..आखिर करने क्या आए स्वास्थ्य मंत्री? 
स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह ने सोमवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचकर समस्याओं को हल करने के बजाय उलझा दिया। मंत्री को ना तो पिछले करीब एक सप्ताह से चल रही संविदा कर्मियों की हड़ताल का अतापता था और ना अस्पताल की व्यवस्थाओं की जानकारी।

सोमवार को अस्पताल में जब हड़ताली उपनल संविदा कर्मियों ने उनका घेराव किया तो उन्होंने कर्मियों को टालने का प्रयास किया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि उन्हें कर्मियों की मांग पता नहीं है। इस पर कर्मचारी भड़क उठे और खूब हंगामा किया। एक हफ्ते बाद भी मंत्री को आंदोलनकारियों की मांग पता ना होना और कमजोर होमवर्क सरकार के ढीले-ढाले रवैये की ओर इशारा करता है। यही नहीं उनमें अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी जानकारी का अभाव दिखा। मंत्री अस्पतालों में पर्याप्त दवा होने का दावा करते रहे, जबकि उसी अस्पताल में रिंगल सॉल्यूशन समेत कई जरूरी दवाएं कई दिनों से खत्म है।

दूसरी ओर उन्होंने जिला अस्पताल को लेकर भी कंफ्यूजन बढ़ा दिया। कुछ दिन पहले नया जिला अस्पताल बनाने का दावा करने वाले स्वास्थ्य मंत्री ने यू टर्न लेते हुए पटेलनगर में नया मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनाने की घोषणा कर डाली। यही नहीं उन्होंने अस्पताल का संचालन करने के लिए संयुक्त समिति गठित करने का भी एलान किया। हालांकि दो अलग-अलग विभागों की व्यवस्था कैसे चलेगी, इसको लेकर अधिकारी अपना सिर खपा रहे हैं।


जिला अस्पताल बनाए रखें
दून जिला चिकित्सालय बचाओ संघर्ष समिति ने स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन देकर दून अस्पताल को जिला अस्पताल बनाए रखने की मांग की। बीएस कलूड़ा और महेंद्र भंडारी ने स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन देकर कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल कहीं दूसरी जगह बनाया जाए।

Publised By : Nirmala Suyal

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