#MeToo में फंसे बीजेपी नेता संजय कुमार की बढ़ेंगी मुश्किलें, पीड़िता ने बयान दर्ज करा खोले सारे राज
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भाजपा के पूर्व प्रदेश संगठन मंत्री संजय कुमार से जुड़े मीटू प्रकरण में बुधवार को पीड़िता आखिरकार एसपी देहात सरिता डोभाल के आफिस पहुंच गई। पीड़िता ने दो घंटे आफिस में रहकर अपने बयान दर्ज कराए है। घटना के डिटेल बयान के लिए पीड़िता को बृहस्पतिवार को फिर बुलाया गया है। पीड़िता काफी समय से असुरक्षा के माहौल में बयान दर्ज कराने से डर रही थी।
भाजपा महिला कार्यकर्ता को पूर्व संगठन मंत्री संजय कुमार पर अश्लील एसएमएस भेजने के मामले में पीड़िता आखिरकार बुधवार को पुलिस के सामने पहुंच गई। पीड़िता ने 10 नवंबर को ईमेल के जरिए एसएसपी को मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर भेजी थी। एसएसपी ने मामले की जांच एसपी देहात को सौंप दी थी।
आरोपी के सत्ताधारी पार्टी से जुड़े होने के कारण पीड़िता पहले दिन से अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित थी। पुलिस अधिकारियों से कई बार बात करने के बाद पीड़िता को सुरक्षा उपलब्ध कराने में हीलाहवाली की गई। वकील के माध्यम से भेजी गई सुरक्षा की अर्जी रिसीव नहीं की गई।
लिखित बयान को स्वीकार नहीं किया गया
पीड़िता ने बुधवार को एसपी देहात सरिता डोभाल को फोन पर बात कर बयान दर्ज कराने के लिए समय मांगा था। एसपी ने पीड़िता को दोपहर बाद तीन बजे आने समय दिया था। पीड़िता निर्धारित समय पर एसपी देहात के पास पहुंच गई। तीन बजे से लेकर शाम पांच बजे तक पीड़िता के बयान दर्ज किए गए।
इस दौरान पीड़िता से एसपी देहात द्वारा कई सवाल भी किए गए। पीड़िता का कहना है कि एसपी देहात के आफिस में दो घंटे उनके बयान दर्ज हुए। हालांकि लिखित बयान को स्वीकार नहीं किया गया। बृहस्पतिवार को बयान दर्ज कराने को फिर से बुलाया गया है।
पीड़ित महिला ने बुधवार को आकर तहरीर के समर्थन में बयान दर्ज कराए हैं। डिटेल बयान और मुकदमा दर्ज कराने के लिए अधिवक्ता से मंत्रणा करने के बाद बृहस्पतिवार को आने की बात कही है। पीड़िता की तरफ से किसी तरह का लिखित बयान नहीं आया है।
- सरिता डोभाल, पुलिस अधीक्षक देहात
यह था पूरा मामला
भाजपा से जुड़ी एक महिला ने प्रदेश भाजपा के महामंत्री (संगठन) संजय कुमार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर प्रदेश की राजनीति में सियासी भूचाल ला दिया था। महिला कार्यकर्ता ने पूर्व प्रदेश संगठन मंत्री संजय कुमार पर अश्लील मैसेज भेजने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
पीड़िता का कहना था कि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने शिकायत करने के बाद आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस भी दबाव में उनकी शिकायत को दबाए हुए है। पीड़ित महिला ने अमर उजाला आफिस आकर आपबीती सुनाते हुए साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। मीटू प्रकरण सुर्खियां बना, तब जाकर संजय कुमार को पद से हटाया गया।