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मीटर बताएगा, कहां जा रहा आश्रमों का गंदा पानी
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 02 Jun 2015 04:20 PM IST
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गंगा किनारे बने आश्रम वाले चोरी छिपे भी सीवरेज गंगा में नहीं डाल पाएंगे। इसके लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर आश्रमों में मीटर व्यवस्था लागू की जानी है।
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तीर्थनगरी हरिद्वार और ऋषिकेश से इसकी शुरूआत की जाएगी। फिलहाल इसके लिए सर्वेक्षण का काम चल रहा है। एक हफ्ते के भीतर सर्वेक्षण की रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। गंगा में प्रदूषण के लिए आश्रमों से रोजाना बड़े पैमाने पर निकलने वाले सीवरेज को भी बड़ा कारण माना गया है।
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इसी के चलते एनजीटी ने निर्मल गंगा के लिए सबसे पहले ऐसे आश्रमों की तकनीकी मानीटरिंग के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के निर्देश पर उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और नगर निकायों की गठित समिति सर्वेक्षण कर रही है।
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समिति ने आश्रमों के अलावा होटलों और दूसरे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के सीवरेज निस्तारण के बारे में भी जानकारी जुटाई है। यह सर्वेक्षण हरिद्वार, ऋषिकेश, लक्ष्मणझूला और मुनिकीरेती क्षेत्र के आश्रमों और होटलों में भी हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, सर्वेक्षण में कुछ ही ऐसे आश्रम मिले हैं, जिनके सीवरेज का निस्तारण सही तरीके से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में होता है। रिपोर्ट पूरी होने के बाद बोर्ड आश्रमों को नोटिस भेजकर व्यवस्था सुधारने के निर्देश देगा।
ऐसे होगी मीटर व्यवस्था
सर्वेक्षण में यह पता लगाया गया है कि आश्रम या होटल में पानी की आपूर्ति का साधन क्या है? अगर हैंडपंप, ट्यूबवेल से पानी आता है तो इन पर मीटर लगाना होगा। पानी बाहर की लाइन से आता है तो आश्रम में इस लाइन पर मीटर लगेगा।
इसी तरह जहां से जिस आश्रम का सीवरेज सीवर लाइन में मिलता है, उस जगह पर मीटर स्थापित होगा। रोजाना पानी की आपूर्ति और सीवरेज की निकासी का मीटर की रीडिंग से अंतर निकाला जाएगा। अंतर ज्यादा मिला, तो देखा जाएगा कि बाकी पानी कहां खपाया जा रहा है।
एनजीटी के निर्देश पर फिलहाल हरिद्वार और ऋषिकेश के आश्रमों के सर्वेक्षण का काम चल रहा है। सर्वेक्षण का काम जल्द पूरा हो जाएगा। उसके बाद दिशा निर्देश तय किए जाएंगे।
- विजय सिंघल, सदस्य सचिव उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड