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ग्लेशियर पिघलने से बढ़ गई लोगों की मुश्किल

Tue, 18 Apr 2017 02:07 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़)
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़) Updated Tue, 18 Apr 2017 02:07 PM IST
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melting glacier create problem for public
glaciers - फोटो : Getty Images

तापमान बढ़ने के साथ ही ग्लेशियर पिघलने लगे हैं। ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। 

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मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली गोरी नदी भी उफान पर है। गोरी में बसंतकोट के पास बनाया गया अस्थायी पुल का एक हिस्सा पानी में डूब गया है। इससे पुल को खतरा पैदा हो गया है।

बसंतकोट में इस स्थान पर पहले झूलापुल था। यह झूलापुल 2013 की आपदा में बह गया था। इस स्थान पर लोक निर्माण विभाग अब तक नए झूलापुल का निर्माण नहीं कर पाया है।
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वहां पर लकड़ी का एक अस्थायी पुल तैयार किया गया है। इसी पुल से गोरीपार के बसंतकोट, बोथी, फाफा, जौलढुंगा, उछैती, भटकूड़ा, बादनीधार, धूरातोली, रिंगू, चुलकोट गांवों की तीन हजार की आबादी आवागमन करती है। यदि पुल बहता है तो गोरीपार का शेष दुनिया से संपर्क कट जाएगा क्योंकि गोरीपार जाने के लिए अन्य कोई रास्ता नहीं है।
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एक हफ्ते से तापमान बढ़ते ही नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गोरी में बनाए गए अस्थायी पुल का एक हिस्सा नदी में डूब गया है। यदि जल्दी पुल की सुरक्षा के कदम नहीं उठाए गए तो गोरीपार के लोगों के लिए आवागमन की समस्या हो जाएगी।

पिछले दिनों भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रयाग सिंह पालीवाल ने इस मामले की जानकारी एसडीएम विवेक प्रकाश को दी थी। एसडीएम ने लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी को निर्देश दिए कि तत्काल पुल की सुरक्षा के उपाय करें। इधर, पुल का एक हिस्सा पानी में डूबने से लोग उसमें यात्रा करने में डर रहे हैं। नदी के पानी की रफ्तार लगातार बढ़ रही है।


लोनिवि के ईई ने बताया कि पुल की सुरक्षा का तरीका निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि पुल के निचले हिस्से में पत्थरों की दीवार लगाकर इसे नदी की सतह से ऊपर उठाया जाएगा। जल्द ही यह काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने लोगों से कहा है कि जिस समय नदी के पानी का स्तर बढ़ा हो उस समय पुल को पार करने की कोशिश न करें। बता दें कि अप्रैल मध्य से गोरी का जलस्तर बढ़ने लगता है। गोरी जौलजीबी में महाकाली में मिल जाती है। इस कारण महाकाली का जलस्तर भी इस समय बढ़ जाता है। 

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