फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   meeting on lokpal bill

उत्तराखंड में कांग्रेस ब्रांड का होगा लोकपाल बिल

Tue, 19 Nov 2013 07:47 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Nov 2013 07:47 AM IST
विज्ञापन
meeting on lokpal bill

उत्तराखंड सरकार न तो नए लोकायुक्त कानून को जस का तस लागू करना चाहती है और न ही संशोधन की जहमत उठाना चाहती है। उसकी नजर केंद्र सरकार के लोकपाल बिल पर है।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री ने साफ की अपनी मंशा
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपनी मंशा साफ भी कर दी है। उनका कहना है संसद के शीतकालीन सत्र में लोकपाल कानून पास होना है जिसे हम भी लागू कर देंगे। साफ है बिल पूरी तरह से कांग्रेसी होगा लिहाजा सरकार को उसकी ब्रांडिंग में भी सहूलियत होगी।
विज्ञापन


पढ़ें, इस मंदिर में राष्ट्रपति भवन से आती है भेंट
विज्ञापन
विज्ञापन


लोकायुक्त बिल को लेकर कांग्रेस व सहयोगी दलों के विधायकों की बहुप्रतीक्षित बैठक में कोई निर्णय नहीं हुआ। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की अध्यक्षता में करीब ढाई घंटे हुई मशक्कत के बाद तय हुआ कि 15 दिसंबर को फिर बैठक कर संशोधन के बिंदु तय करेंगे। हालांकि बैठक में लोकायुक्त के दायरे से न्यायपालिका को अलग रखने समेत कुछ बिंदुओं पर चर्चा जरूर हुई।

पढ़ें, पूर्णिमा स्नान पर दस लाख लोगों ने लगाई डुबकी

जिस लोकायुक्त बिल में संशोधन का ढिंढोरा सरकार दो महीनों से पीट रही है उसके प्रति कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज की बैठक से पहले दो बार बैठकें स्थगित हो चुकी हैं। अगर केंद्र का लोकपाल बिल ही लागू किया जाना है तो इस संशोधन बैठक का औचित्य ही क्या था।

गंभीरता से नहीं लिया
दो बार टलने के बाद बैठक हुई लिहाजा सत्तापक्ष के 40 विधायकों में ज्यादातर को होना चाहिए था, लेकिन 16 विधायकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बैठक में पांच मंत्री गैरहाजिर थे। सरकार ने 15 दिसंबर तक का समय इसीलिए दिया है ताकि तमाम संशोधनों के बाद तैयार केंद्र सरकार का लोकपाल बिल उत्तराखंड में लागू किया जा सके।

इससे सरकार की अपने समानांतर खड़े दिखने वाले नए लोकायुक्त बिल से भी मुक्ति मिल जाएगी। वहीं भाजपा जिस बिल को बार-बार अपना बता रही है उससे भी पीछा छूट जाएगा। बैठक में कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, हरीश दुर्गापाल, बसपा विधानमंडल दल के नेता विधायक हरिदास, निर्दलीय दिनेश धनै समेत कई विधायक मौजूद रहे।


इन बिंदुओं पर है आपत्ति
न्यायपालिका को लोकायुक्त के अधीन लाना
कोर्ट लगाकर सजा सुनाने जैसे प्रावधान

40 में से 16 गैरहाजिर
मुख्यमंत्री की बुलाई बैठक में कांग्रेस व सहयोगी दलों के 40 विधायकों में से 16 आए ही नहीं। संशोधन पर विरोध करने वाले सहयोगी दलों के मंत्री प्रसाद नैथानी और प्रीतम पंवार ने एकजुटता का राग अलाप संशोधन न होने पर बयानबाजी जरूर की, लेकिन बैठक में नहीं गए।

साफ है कि संशोधन को लेकर सरकार और सहयोगियों के बीच कहीं न कहीं सहमति जरूर है। वहीं केंद्रीय मंत्री हरीश रावत गुट के कहे जाने वाले एक भी विधायक बैठक में नहीं थे।

ये नहीं आए
कैबिनेट मंत्री अमृता रावत, सुरेंद्र सिंह नेगी, मंत्री प्रसाद नैथानी, प्रीतम सिंह पंवार और सुरेंद्र राकेश। विधायकों में हेमेश खर्कवाल, मयूख महर, ललित फर्स्वाण, हरीश धामी, मनोज तिवारी, पूरण फर्त्याल, शैलेंद्र मोहन सिंघल, जीतराम आर्य, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और सुबोध उनियाल।

फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें---

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed