अमित शाह के घर जुटे दिग्गज, हाईकोर्ट के फैसले को SC में चैलेंज करेगा केंद्र
- - अटॉर्नी जनरल ने कहा, केंद्र शुक्रवार को हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में देगा चुनौती
- - फैसले पर स्टे की मांग करेगी मोदी सरकार, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संभाला कानूनी मोर्चा
- - भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राजनाथ, जेटली व महासचिव विजयवर्गीय के साथ किया मंथन
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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट से मिले सियासी झटके के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि केंद्र शुक्रवार को हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ लंबी बैठक की। इसी बैठक में हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में तत्काल चुनौती देने पर सहमति बनी। इसके बाद केंद्र के निर्णय के संदर्भ में रोहतगी ने इस आशय की जानकारी दी।
दरअसल हाईकोर्ट के निर्णय ने भाजपा और मोदी सरकार को बुरी तरह से उलझा कर रख दिया है। खास तौर पर डबल बेंच की बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को सही ठहराने की टिप्पणी ने केंद्र और भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। भाजपा को उम्मीद थी कि अगर इन विधायकों को वोट करने का अधिकार मिला, तो रावत सरकार को बहुमत साबित करने का मौका मिलने पर भी सियासी पटकनी दी जा सकती है।
अरुण जेटली ने खुद संभाला मोर्चा
सूत्रों ने बताया कि नई सियासी परिस्थिति में अब कानूनी मोर्चा खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संभाल लिया है। इसकी शुरुआत उन्होंने बैठक में ही कर दी थी। बैठक में उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले के कमजोर बिंदुओं की जानकारी दी।
इसी बैठक में विमर्श के बाद तय हुआ कि सरकार के पास अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। भाजपा को डर है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस बाकी बचे 27 और बसपा, यूकेडी व निर्दलीय विधायकों के सहारे 29 मार्च को बहुमत का जरूरी आंकड़ा हासिल कर लेगी।
शुक्रवार को केंद्र हाईकोर्ट के फैसले पर तत्काल स्टे लगाने की मांग करेगा। इस दौरान केंद्र एकल बेंच में बागी विधायकों की सदस्यता पर सुनवाई जारी रहते डबल बेंच की ओर से इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने का मामला भी उठाएगा। यही नहीं, डबल बेंच की ओर से राष्ट्रपति पर की गई टिप्पणी का भी हवाला दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट से पक्ष में फैसला आने को लेकर आश्वस्त नहीं केंद्र
भले ही मोदी सरकार ने हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला कर लिया है। मगर सूत्र बताते हैं कि पार्टी और सरकार सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
इन्हें डर है कि कहीं सुप्रीम कोर्ट स्टे देने और रावत सरकार को बहुमत हासिल करने से रोक लगाने से इनकार न कर दे। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई लंबी खिंच सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह स्थिति केंद्र के अनुकूल नहीं होगी।