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IAS रंजीत करेंगे दून पुलिस की लापरवाही की जांच
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 05 Jul 2015 12:54 PM IST
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उत्तराखंड सरकार ने मेडिकल पीजी दाखिलों में दलाली के मामले में दो जांच अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं। जिला पुलिस की लापरवाही और सही दायित्व का निर्वहन नहीं करने के मामले की जांच आईएएस अफसर रंजीत सिन्हा करेंगे।
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इसमें एसओजी से लेकर एसएसपी की भूमिका तक की जांच होगी। इसी मामले में जिले से हटाए गए एडिशनल एसपी की जांच आईपीएस अजय रौतेला करेंगे।
कई दिन की कसरत के बाद शासन ने मेडिकल पीजी दाखिलों के प्रकरण में विस्तृत रूप से दो जांच होगी। एक मामले की जांच आईएएस व एक की आईपीएस अफसर को सौंपी गई है। शनिवार को शासन ने जांच अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है।
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शासन ने पूरे प्रकरण को दो हिस्सों में बांटा है। एक जांच जिला पुलिस की लापरवाही व दायित्व निर्वहन में कोताही की होगी। यह जांच आईपीएस सदानंद दाते की जांच रिपोर्ट से आगे की विस्तृत जांच होगी। वृहद स्तर की इस जांच का जिम्मा आईएएस रंजीत सिन्हा करेंगे।
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रंजीत इस समय शासन में अपर सचिव गृह के पद पर तैनात है। सिन्हा इस बात की भी जांच करेंगे कि पुलिस के लापरवाह होने के पीछे क्या वजह है और वरिष्ठ अफसरों ने समय रहते त्वरित कार्रवाई क्यों की, ऐसे क्या कारण थे कि पीएचक्यू को जिला पुलिस से जांच छीनकर एक वरिष्ठ आईपीएस से करानी पड़ी।
इसके अलावा इसी मामले में हटाए गए एडिशनल एसपी मणिकांत मिश्रा की विस्तृत जांच आईपीएस अजय रौतेला को सौंपी गई है, रौतेला भी इस समय शासन में अपर सचिव गृह है। दोनों जांच अधिकारियों को शासन ने यथाशीघ्र जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। दोनों जांच अधिकारियों की नियुक्ति और उनकी जांच के क्षेत्राधिकार की पुष्टि प्रमुख सचिव गृह मनीषा पंवार ने की।
...लेकिन यहां विवि केसाथ खड़ी सरकार
देहरादून। मेडिकल पीजी दाखिलों में सरकार भी दोहरे मानदंड अपना रही है। एक तरफ जिला पुलिस के खिलाफ बड़ी कार्रवाई और विस्तृत स्तर की जांच हो रही है, दूसरी तरफ 2006 के एक्ट के अनुसार गठित दाखिला व शुल्क कमेटी और स्वामी राम हिमालयन विवि जौलीग्रांट के मामले को लेकर पूरी सरकार अपनी कमेटी को छोड़ विवि के पक्ष में खड़ी हो गई है।
कमेटी दाखिलों में पारदर्शिता व शुल्क निर्धारण की बात करती है तो विवि का कहना है कि उसके ऊपर कमेटी का नियंत्रण नहीं है। इस मामले में सरकार और शासन अपनी कमेटी को छोड़कर विवि के पक्ष की बात कर रहे हैं।