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राहत: विदेश से मेडिकल ग्रेजुएट छात्रों को इंटर्नशिप में मिलेगा कोटा, एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया फैसला
Mon, 25 Apr 2022 10:57 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 25 Apr 2022 10:57 AM IST
सार
रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन में कोविड-19 महामारी की वजह से विदेशों में अपनी इंटर्नशिप पूरी नहीं कर सके एमबीबीएस विद्यार्थियों को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने नियमों में बदलाव कर राहत दी है। यह राहत फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जाम (एफएमजीई) पास कर चुके विद्यार्थियों के लिए है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विदेश से मेडिकल ग्रेजुएट (एमबीबीएस) छात्र-छात्राओं को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप में कोटा दिया जाएगा। कॉलेज की एकेडमिक काउंसिल ने यह निर्णय लिया है। रविवार को कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने एकेडमिक काउंसिल की बैठक का कार्यवृत्त जारी किया।
रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन में कोविड-19 महामारी की वजह से विदेशों में अपनी इंटर्नशिप पूरी नहीं कर सके एमबीबीएस विद्यार्थियों को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने नियमों में बदलाव कर राहत दी है। यह राहत फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जाम (एफएमजीई) पास कर चुके विद्यार्थियों के लिए है।
एफएमजीई उन विदेशी छात्रों के लिए आयोजित होती है जो विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके आते हैं। अगर कोई इस परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसे इंटर्नशिप और प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं मिलती है। विदेश से मेडिकल ग्रेजुएट छात्र-छात्राओं के इंटर्नशिप का यह कोटा संबंधित मेडिकल कॉलेज की अधिकतम सीटों का 7.5 फीसदी तक हो सकता है। यानी किसी कॉलेज में 150 सीटें हैं तो वहां विदेश से मेडिकल ग्रेजुएट 11 छात्र-छात्राएं इंटर्नशिप कर सकेंगे।
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि अभी तक विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को भारत में स्थानांतरण लेकर इंटर्नशिप या परीक्षा देने की अनुमति नहीं थी। उन्हें कोर्स की पढ़ाई, प्रशिक्षण और इंटर्नशिप सब कुछ उसी विदेशी कॉलेज में पूरा करना होता था। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के नए नियमों से अब इन तमाम छात्र-छात्राओं को राहत मिल सकेगी।
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रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन में कोविड-19 महामारी की वजह से विदेशों में अपनी इंटर्नशिप पूरी नहीं कर सके एमबीबीएस विद्यार्थियों को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने नियमों में बदलाव कर राहत दी है। यह राहत फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जाम (एफएमजीई) पास कर चुके विद्यार्थियों के लिए है।
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एफएमजीई उन विदेशी छात्रों के लिए आयोजित होती है जो विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके आते हैं। अगर कोई इस परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसे इंटर्नशिप और प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं मिलती है। विदेश से मेडिकल ग्रेजुएट छात्र-छात्राओं के इंटर्नशिप का यह कोटा संबंधित मेडिकल कॉलेज की अधिकतम सीटों का 7.5 फीसदी तक हो सकता है। यानी किसी कॉलेज में 150 सीटें हैं तो वहां विदेश से मेडिकल ग्रेजुएट 11 छात्र-छात्राएं इंटर्नशिप कर सकेंगे।
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि अभी तक विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को भारत में स्थानांतरण लेकर इंटर्नशिप या परीक्षा देने की अनुमति नहीं थी। उन्हें कोर्स की पढ़ाई, प्रशिक्षण और इंटर्नशिप सब कुछ उसी विदेशी कॉलेज में पूरा करना होता था। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के नए नियमों से अब इन तमाम छात्र-छात्राओं को राहत मिल सकेगी।
एकेडमिक काउंसिल के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जाम (एफएमजीई) पास कर चुके 11 विद्यार्थियों को कॉलेज इंटर्नशिप कराएगा।
एमबीबीएस छात्रों के लिए एकेडमिक कैलेंडर और पीजी में फैकल्टी के लिए तय होगा टीचिंग रोस्टर।
असिस्टेंट एकेडमिक डीन डॉ. चित्रा त्रिपाठी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी।
अपेक्षा के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे इंटर्नशिप मेंटर को इंटर्न कोड ऑफ कंडक्ट के तहत सुधार के निर्देश।
अकादमिक सुधार के लिए विभागाध्यक्ष माह में कम से कम एक बार छात्रों से संवाद करेंगे।
एमबीबीएस छात्रों के लिए एकेडमिक कैलेंडर और पीजी में फैकल्टी के लिए तय होगा टीचिंग रोस्टर।
असिस्टेंट एकेडमिक डीन डॉ. चित्रा त्रिपाठी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी।
अपेक्षा के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे इंटर्नशिप मेंटर को इंटर्न कोड ऑफ कंडक्ट के तहत सुधार के निर्देश।
अकादमिक सुधार के लिए विभागाध्यक्ष माह में कम से कम एक बार छात्रों से संवाद करेंगे।