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सावधान! चांदी वर्क के नाम पर बड़ा गोरखधंधा
राकेश शर्मा/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Sun, 27 Oct 2013 02:12 PM IST
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चांदी वर्क के नाम पर कई बेनामी कंपनियां बड़ा गोरखधंधा कर रही हैं। इनके रैपर पर न तो कंपनी का पता है और न ही रजिस्ट्रेशन नंबर छपा है।
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वर्क बेचने वाली बेनामी कंपनियों के गोरखधंधे से पर्दा तब उठा जब अमर उजाला के प्रतिनिधि ने शनिवार को अलग-अलग दुकानों से वर्क के दो पैकेट खरीदे। पहली दुकान से जो वर्क का पैकेट खरीदा वह पैकेट चांदी वर्क का नहीं एल्युमीनियम वर्क का था।
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ब्रांड का अता पता नहीं
उसके रैपर पर न तो ब्रांड का असली नाम था और न कंपनी का पता अंकित था। वर्क रैपर के ऊपर फूड ग्रेड, नाम और इंडिया लिखा है। रैपर में दस वर्क रखे हैं। बाजार में यह पैकेट 40 रुपये में बिक रहा है।
वर्क कहां से आता है, कौन सी कंपनी बनाती है, इस बारे में जानकारी ली गई तो दुकानदार ने इसकी अनभिज्ञता जता दी। इतना जरूर बताया कि बरेली का एक फेरीवाला वर्क पैकेट बेचने यहां आता है। यहां के लोग इसे ही चांदी वर्क में खरीदकर ले जाते हैं।
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150 रुपये इसकी कीमत
यह दुकान मीरा मार्ग में है। दूसरे वर्क का पैकेट पटेल चौक की एक दुकान से खरीदा। यह वर्क चांदी का था, जिसे दिल्ली की एक कंपनी बनाती है। इस कंपनी के पैकेट में 50 वर्क होते हैं और 150 रुपये इसकी कीमत है।
दुकानदार ने वर्क चांदी का है या एल्युमीनियम का, इसकी पहचान भी बताई। एक व्यापारी ने बताया कि दिल्ली, बरेली के अलावा मेरठ की कई कंपनियां हैं जो यह गोरखधंधा कर मुनाफाखोरी कर रही हैं।
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ऐसे करें चांदी वर्क की पहचान
यदि आप मिठाई या पान खरीद रहे हैं और उसमें वर्क लगा है तो इसकी पहचान कर सकते हैं। दोनों वर्क को अलग-अलग मसलें, अगर वर्क के मसलने से अंगुलियों पर वर्क के रेसे नहीं रहते हैं तो वर्क चांदी का है, यदि वर्क के रेसे अंगुलियों पर चिपकते हैं तो वह वर्क एल्युमीनियम का होगा।
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मिठाई विक्रेताओं की है सांठगांठ
मिठाई विक्रेता शोभा बढ़ाने के लिए काला जामुन, बर्फी, बालूशाही, छेने की मिठाई समेत अन्य मिठाइयों में वर्क लगाते हैं। पान विक्रेता मीठे पान में इसका प्रयोग करते हैं। मिठाई विक्रेता बेनामी कंपनियों के प्रतिनिधियों से सांठगांठ कर मुनाफाखोरी कर रहे हैं।