मौलाना मोमिन बोले, तीन तलाक पर कानून बनना मुसलमानों के कर्मों का नतीजा
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आज तीन तलाक के मामले में देश में जो कानून बनाया गया है या शरई कानून में फेरबदल की बात की जा रही है, यह सब मुसलमानों के आमाल (कर्म) का नतीजा है। मुसलमानों ने शरीयत को अपने मिजाज के मुताबिक इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से लोगों को इस पर उंगली उठाने का मौका मिला। हजरत निजामुद्दीन मरकज दिल्ली से आए मौलाना मोमिन संभली ने इज्तिमा के अंतिम दिन रविवार को यह बात कही।
कई मुल्कों में तकरीरें कर चुके यूपी के संभल निवासी मौलाना मोमिन ने पौने दो घंटे तक समाज और शरीयत संबंधी ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज मामूली बात पर तीन तलाक देना आम हो गया है, जबकि तलाक देने वाले से परवरदिगार बेहद नाराज होता है। अपने गुनाहों की सच्चे दिल से रब से माफी मांगें और दोबारा गुनाह न करने का संकल्प लें।
अल्लाह माफ करने वाला है, जरूर माफ करेगा। उन्होंने कहा कि आज मुसलमानों के पास ईमान की कमी है। वह झूठ, चोरी, चुगलखोरी, फरेब, रिश्वतखोरी, सूदखोरी छोड़ दें तो उनका ईमान पाक हो जाएगा। कहा कि लोगों को शरीयत पर उंगली उठाने का मौका आपने दिया।
माता-पिता का दिल न दुखाओ
मौलाना ने कहा कि वालिदेन (माता-पिता) की इज्जत करो। बुढ़ापे में उनकी हर जरूरत की जिम्मेदारी हमारे ऊपर है। उनसे ऊंची आवाज में बात मत करो। सभी अपनी जिम्मेदारी को समझेंगे तो वृद्धाश्रम की जरूरत नहीं होगी। सोचना चाहिए कि कल हमें भी बूढ़ा होना है, आज नहीं सुधरे तो कल हमें भी यही दिन देखने पड़ सकते हैं।
कन्या भ्रूण हत्या समाज पर कलंक
मौलाना मोमिन ने कन्या भ्रूण हत्या को कलंक बताते हुए कहा कि इस काम को जानवर भी नहीं करता। इसलिए बेटे और बेटियों को पढ़ाओ, उन्हें काबिल बनाओ।
इंसान बिगड़ता है तो तबाही आती है
मौलाना ने कहा कि आज देश और दुनिया 1400 साल पहले की तबाही की ओर जा रही है। गलत कामों को कानूनी मान्यता दी जा रही है। जिसे माडर्न नाम दिया जा रहा है, वह हैवानियत की ओर ले जाने वाला है। वाहन या मशीन बिगड़ती है तो थोड़ा नुकसान होता है, जब इंसान बिगड़ता है तो तबाही आती है।