मातृशक्ति सम्मेलन: पहाड़ की 'पहाड़' जैसी समस्याओं पर आवाज उठाने से ही होगी तरक्की-सीएम
- समाज को शक्ति और नई दिशा देने में महिलाओं क अहम भूमिका
- ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनेंगे ग्रोथ सेंटर
- बंदरों व जंगली जानवरों की समस्या से खेती का विकल्प तलाशें
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पहाड़ की समस्याओं को लेकर गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर में अमर उजाला और राज्य सरकार के संयुक्त मातृशक्ति सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। समाज को शक्ति और नई दिशा देने में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। प्रदेश सरकार की महिलाओं के उत्थान व आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सकारात्मक सोच है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक किसी भी मुद्दे पर मंथन नहीं करेंगे तब तक आगे नहीं बढ़ सकते हैं। इसी मकसद से राज्य स्थापना दिवस पर अलग-अलग जगह पर कार्यक्रम किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि संवाद सीधे गांव से सचिवालय तक होना चाहिए। पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 62 ग्रोथ सेंटर को मंजूरी दी है।
वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में खेतीबाड़ी में जंगली जानवर व बंदरों की सबसे बड़ी समस्या है। इसके लिए खेती के नए विकल्प को अपनाना होगा। एरोमेटिक, फूलों की खेती, अदरक, हल्दी के साथ सौर ऊर्जा इसका सबसे बड़ा विकल्प है। सरकार ने 600 करोड़ के 202 प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी है।
पिरुल की पत्तियों से बिजली और बायोफ्यूल बनाने के लिए 41 प्रोजेक्टों को मंजूरी दी गई है। इससे दो लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। सीएम ने कहा कि पिछले तीन सालों में प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार हुआ है। कन्या भ्रूण हत्या के कारण लिंगानुपात घट रहा है। जबकि प्रकृति संतुलन रखती है।
बेटियों को बचाने के लिए उठाने होंगे कदम: रेखा शर्मा
केंद्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि बेटियों को समानता व स्वायत्ता का अधिकार मिलना चाहिए। पहाड़ों में 80 प्रतिशत महिलाएं खेतीबाड़ी करती है। लेकिन जमीन महिलाओं के नाम पर नहीं है। माता-पिता की संपत्ति पर सिर्फ बेटों का ही अधिकार क्यों है।
उत्तराखंड में भी बेटियां कम पैदा हो रही हैं और खून की कमी के कारण गर्भवती महिला की मौत हो रही है। उन्होंने इस पर सरकार से महिलाओं के स्वास्थ्य और लिंगानुपात सुधारने पर ध्यान देने का आग्रह किया।
अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने गढ़वाली में संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान के प्रति संवेदनशील है। सम्मेलन में जो भी सुझाव आएंगे सरकार उन्हें नीतियों में शामिल करेगी।
मातृशक्ति ने ही पहाड़ को बचाए रखा है: हिमानी शिवपुरी
फिल्म अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने कहा कि अभिनेत्री से पहले मैं पहाड़ की बेटी हूं। मातृशक्ति ने ही पहाड़ को बचा कर रखा है। गौरा देवी, टिंचरी माई, विमला बहुगुणा समेत तमाम महिलाओं का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता है।
उत्तराखंड समृद्ध है। लेकिन यहां के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिल पाई है। जिस तरह से मलयालम, पंजाब, गुजरात फिल्म प्रसिद्ध हो रही है। उसी तरह उत्तराखंड में गढ़वाली व कुमाऊंनी फिल्म बननी चाहिए।
अमर उजाला उत्तराखंड के संपादक संजय अभिज्ञान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों कीआवाज उठानी चाहिए। मानव विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दुश्वारियां झेलने के बाद भी महिलाएं प्रसन्न है। मन में दुख झेल कर खुश रहना सही नहीं है। इसके लिए महिलाओं को अपने हक के लिए सवाल खड़े करने चाहिए। अमर उजाला के मार्केटिंग प्रेजीडेंट राजीव केंटल ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम का संचालन जनेंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार धन सिंह रावत, राज्य मंत्री दीप्ति रावत, विधायक ऋतु खंडूड़ी, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी, पदम श्री बसंती बिष्ट, फिल्म अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी, लोक गायिका संगीता ढौंडियाल, प्रो. सुरेखा डंगवाल आदि मौजूद थे। इसके साथ ही समापन सत्र में लोक गायिका संगीता ढौंढियाल और जागर गायिका बसंती बिष्ट ने अपने जागर और गीतों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।