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25 हजार का इनामी मनोज ठाकुर दून में गिरफ्तार
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25 हजार का ईनामी आजमगढ़ का मनोज सिंह ठाकुर पुलिस गिरफ्त में
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से आठ दिन पहले मुंबई क्राइम ब्रांच की हिरासत से फरार हुए 25 हजार के इनामी मनोज सिंह ठाकुर को एसओजी और राजपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ मुंबई, यूपी और देहरादून में 22 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री आवास योजना में धांधली और रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी में मनोज का नाम सुर्खियों में रहा।
पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे ने बृहस्पतिवार को मीडिया को मनोज की गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजपुर में मसूरी रोड निवासी सावित्री सिंह ने दो जनवरी को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुनील मल्होत्रा आदि ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसका फ्लैट खरीदा है। जांच में पता चला कि सावित्री से तलाक लेने वाले पति मनोज सिंह ठाकुर ने ही फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर यह 98 लाख रुपये में फ्लैट बेचा था। इस मामले में पुलिस को मनोज ठाकुर के बयान दर्ज करने थे। जांच में पता चला कि मनोज ठाकुर मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है, लेकिन अब मुंबई में बस गया है। इस बारे में मुंबई और यूपी पुलिस से संपर्क किया गया।
एसपी सिटी ने बताया कि मुंबई पुलिस ने तीन दिन पहले सूचना दी कि मनोज सिंह ठाकुर आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) से मुंबई पुलिस हिरासत से फ रार हो गया है। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। आजमगढ़ से भागकर वह दून में पत्नी और बच्चाें से मिलने आ सकता है। यह जानकारी मिलने के बाद डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने एसपी सिटी के नेतृत्व में टीम गठित की। मनोज के संभावित ठिकानाें पर पुलिस लगातार नजर रख रही थी।
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एसपी ने बताया कि एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल और थानाध्यक्ष अशोक राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मसूरी रोड पर जोहड़ी में बुधवार शाम एक संदिग्ध कार को रोक लिया। कार में पिछली सीट पर बैठे व्यक्ति का हुलिया मनोज सिंह ठाकुर से काफी मेल खाता था। मनोज पहचान छिपाने की कोशिश करता रहा। उसकी तलाशी में तमंचा मिलने के बाद सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया। मनोज सिंह ठाकुर निवासी पूनम गार्डन, मीरा रोड, ईस्ट ठाणे (महाराष्ट्र) (मूल निवासी आमगाव थाना दीदारगंज जिला आजमगढ़) के खिलाफ आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज करने के साथ यूपी की आजमगढ़ पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी दे दी गई है।
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मां की बीमारी का बहाना बनाकर हुआ था फरार
देहरादून। आरोपी मनोज सिंह ठाकुर लोगों को अपने जाल में फंसाने में माहिर है। एसपी सिटी श्वेता चौबे ने बताया कि मुंबई पुलिस ने आरोपी को 26 सितंबर 2019 को ठगी के मामले में ठाणे से गिरफ्तार किया था। मुंबई पुलिस उसे 10 फरवरी को वाराणसी में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में पेशी पर लाई थी। मनोज ने मां की बीमारी का बहाना करके मुंबई पुलिस को आजमगढ़ स्थित अपने घर ले जाने को राजी कर लिया था। पुलिस घर के बाहर बैठी रही और वह दूसरे रास्ते से फरार हो गया था। आजमगढ़ से वह सीधे लखनऊ गया और 14 फरवरी को देहरादून आ गया था।
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धोखाधड़ी में सियासी पहुंच का उठाया फायदा
पुलिस ने बताया मनोज सिंह मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है। उसके पिता मुंबई रेलवे में अधिकारी रहे हैं। मुंबई यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद केसी कालेज मुंबई से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ने के बाद 2008 से 2012 तक मनोज महाराष्ट्र में लालू प्रसाद यादव की जनता दल पार्टी का प्रदेश प्रवक्ता रहा। 2012 से 2014 तक महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी का प्रदेश महासचिव रहा। विलास राव देशमुख सरकार के समय महाराष्ट्र में समन्वय समिति का सदस्य भी रहा। समाजवादी पार्टी से जुड़े होने के कारण वर्ष 2016 में आजमगढ़ के मार्टीगंज क्षेत्र से ब्लॉक प्रमुख चुना गया। 2018 में अविश्वास प्रस्ताव आने पर उसे पद से हटा दिया गया था। आजमगढ़ और वाराणसी में रेलवे में नौकरी दिलाने और महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को आवास दिलाने के संबंध में आर्थिक अपराध शाखा में उसके खिलाफ धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज हैं।
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16 साल से लोगों को बना रहा ठगी का शिकार
देहरादून। आरोपी मनोज सिंह 16 साल से ठगी के गोरखधंधे से जुड़ा है। उसके खिलाफ मुंबई में धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का पहला मुकदमा 2004 में दर्ज किया गया था। इसके बाद मुंबई के एमएचबी कालोनी की धोखाधड़ी में उसका नाम आया। इसके बाद हत्या के प्रयास, मारपीट, धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के मुकदमों की लंबी फेहरिस्त बनती चली गई। उसके खिलाफ 22 मुकदमे दर्ज हैं।
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पुलिस टीम को पुरस्कार
डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार और एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने टीम में शामिल एसपी सिटी श्वेता चौबे, सीओ डालनवाला विवेक कुमार, एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल, एसओ अशोक राठौड़, उप निरीक्षक योगेश पांडेय, नीरज त्यागी, एसओजी के कांस्टेबल ललित कुमार, देवेंद्र, अरशद अली, विपिन, पकंज, प्रमोद, आशीष, अमित, देवेंद्र ममगई, अमित भट्ट, अमित कुमार और महावीर सिंह को पुरस्कृत करने की घोषणा की।
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पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे ने बृहस्पतिवार को मीडिया को मनोज की गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजपुर में मसूरी रोड निवासी सावित्री सिंह ने दो जनवरी को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुनील मल्होत्रा आदि ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसका फ्लैट खरीदा है। जांच में पता चला कि सावित्री से तलाक लेने वाले पति मनोज सिंह ठाकुर ने ही फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर यह 98 लाख रुपये में फ्लैट बेचा था। इस मामले में पुलिस को मनोज ठाकुर के बयान दर्ज करने थे। जांच में पता चला कि मनोज ठाकुर मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है, लेकिन अब मुंबई में बस गया है। इस बारे में मुंबई और यूपी पुलिस से संपर्क किया गया।
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एसपी सिटी ने बताया कि मुंबई पुलिस ने तीन दिन पहले सूचना दी कि मनोज सिंह ठाकुर आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) से मुंबई पुलिस हिरासत से फ रार हो गया है। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। आजमगढ़ से भागकर वह दून में पत्नी और बच्चाें से मिलने आ सकता है। यह जानकारी मिलने के बाद डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने एसपी सिटी के नेतृत्व में टीम गठित की। मनोज के संभावित ठिकानाें पर पुलिस लगातार नजर रख रही थी।
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एसपी ने बताया कि एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल और थानाध्यक्ष अशोक राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मसूरी रोड पर जोहड़ी में बुधवार शाम एक संदिग्ध कार को रोक लिया। कार में पिछली सीट पर बैठे व्यक्ति का हुलिया मनोज सिंह ठाकुर से काफी मेल खाता था। मनोज पहचान छिपाने की कोशिश करता रहा। उसकी तलाशी में तमंचा मिलने के बाद सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया। मनोज सिंह ठाकुर निवासी पूनम गार्डन, मीरा रोड, ईस्ट ठाणे (महाराष्ट्र) (मूल निवासी आमगाव थाना दीदारगंज जिला आजमगढ़) के खिलाफ आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज करने के साथ यूपी की आजमगढ़ पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी दे दी गई है।
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मां की बीमारी का बहाना बनाकर हुआ था फरार
देहरादून। आरोपी मनोज सिंह ठाकुर लोगों को अपने जाल में फंसाने में माहिर है। एसपी सिटी श्वेता चौबे ने बताया कि मुंबई पुलिस ने आरोपी को 26 सितंबर 2019 को ठगी के मामले में ठाणे से गिरफ्तार किया था। मुंबई पुलिस उसे 10 फरवरी को वाराणसी में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में पेशी पर लाई थी। मनोज ने मां की बीमारी का बहाना करके मुंबई पुलिस को आजमगढ़ स्थित अपने घर ले जाने को राजी कर लिया था। पुलिस घर के बाहर बैठी रही और वह दूसरे रास्ते से फरार हो गया था। आजमगढ़ से वह सीधे लखनऊ गया और 14 फरवरी को देहरादून आ गया था।
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धोखाधड़ी में सियासी पहुंच का उठाया फायदा
पुलिस ने बताया मनोज सिंह मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है। उसके पिता मुंबई रेलवे में अधिकारी रहे हैं। मुंबई यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद केसी कालेज मुंबई से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ने के बाद 2008 से 2012 तक मनोज महाराष्ट्र में लालू प्रसाद यादव की जनता दल पार्टी का प्रदेश प्रवक्ता रहा। 2012 से 2014 तक महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी का प्रदेश महासचिव रहा। विलास राव देशमुख सरकार के समय महाराष्ट्र में समन्वय समिति का सदस्य भी रहा। समाजवादी पार्टी से जुड़े होने के कारण वर्ष 2016 में आजमगढ़ के मार्टीगंज क्षेत्र से ब्लॉक प्रमुख चुना गया। 2018 में अविश्वास प्रस्ताव आने पर उसे पद से हटा दिया गया था। आजमगढ़ और वाराणसी में रेलवे में नौकरी दिलाने और महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को आवास दिलाने के संबंध में आर्थिक अपराध शाखा में उसके खिलाफ धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज हैं।
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16 साल से लोगों को बना रहा ठगी का शिकार
देहरादून। आरोपी मनोज सिंह 16 साल से ठगी के गोरखधंधे से जुड़ा है। उसके खिलाफ मुंबई में धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का पहला मुकदमा 2004 में दर्ज किया गया था। इसके बाद मुंबई के एमएचबी कालोनी की धोखाधड़ी में उसका नाम आया। इसके बाद हत्या के प्रयास, मारपीट, धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के मुकदमों की लंबी फेहरिस्त बनती चली गई। उसके खिलाफ 22 मुकदमे दर्ज हैं।
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पुलिस टीम को पुरस्कार
डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार और एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने टीम में शामिल एसपी सिटी श्वेता चौबे, सीओ डालनवाला विवेक कुमार, एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल, एसओ अशोक राठौड़, उप निरीक्षक योगेश पांडेय, नीरज त्यागी, एसओजी के कांस्टेबल ललित कुमार, देवेंद्र, अरशद अली, विपिन, पकंज, प्रमोद, आशीष, अमित, देवेंद्र ममगई, अमित भट्ट, अमित कुमार और महावीर सिंह को पुरस्कृत करने की घोषणा की।