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मुफ्त फॉर्म लेने के लिए उमड़े लोग

Wed, 15 Jan 2014 01:09 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 15 Jan 2014 01:09 PM IST
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marriage registration camp of amar ujala

देहरादून में अमर उजाला का विवाह पंजीकरण शिविर जल्द लगने वाला है। इस संबंध में अमर उजाला ने अपने पटेलनगर दफ्तर से लोगों को पंजीकरण कराने के लिए मुफ्त फॉर्म मंगलवार से देना शुरू कर दिया है।

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पंजीकरण कराकर प्रमाण पत्र हासिल करें

ताकि लोग फॉर्म भर कर अमर उजाला के पास जमा करा दें और कैंप में आकर आसानी से अपना विवाह पंजीकरण कराकर प्रमाण पत्र हासिल कर लें। मुफ्त आवेदन पत्र लेने के लिए दूसरी दिन भी बुधवार को सैकड़ों लोग अमर उजाला दफ्तर आए।
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इससे पहले मंगलवार को भी फॉर्म लेने के लिए लोग काफी संख्या में अमर उजाला दफ्तर पहुंचे थे। पंजीकरण से संबंधित लोगों की कई जिज्ञासाओं का समाधान भी किया जा रहा है।

आवेदन पत्र भरकर लोग अमर उजाला दफ्तर में जमा करा सकते हैं। यहां पर फॉर्म चेक किया जाएगा। यदि उसमें कोई गलती हुई तो संबंधित व्यक्ति को बता दिया जाएगा ताकि कैंप में उन्हें कोई परेशानी न हो।

बता दें कि आवेदन फॉर्म बाजार में 40 रुपए में मिलता है। कई लोगों को शिकायत रहती है कि आवेदन फॉर्म ब्लैक में बेचा जाता है।

इसी तरह शादी का पंजीकरण कराने पर वकील लोगों से पांच हजार से अधिक पैसे वसूलते हैं। लेकिन अमर उजाला के कैंप में इन सब समस्याओं से लोगों को दो चार नहीं होना पड़ेगा।

उत्तराखंड में शादी-ब्याह का पंजीकरण महंगा
उत्तराखंड शादी के तामझाम में भले ही अन्य राज्यों से कुछ सस्ता हो लेकिन विवाह के पंजीकरण के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में महंगा तो है ही। हाल यह है कि उत्तर प्रदेश में जो काम चार रुपए में हो रहा है उस काम के लिए प्रदेश में 100 रुपए लिए जा रहे हैं।

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यह भी तब है जबकि 90 दिन के अंदर ही पंजीकरण करा लिया जाए। 90 दिन का समय बीतने के बाद यह पंजीकरण 200 रुपए होगा और पंजीकरण न कराया तो एक हजार रुपए का जुर्माना तक भरना पड़ सकता है। विवाह का पंजीकरण का एक्ट उत्तराखंड में 2010 में लागू किया गया था।

वह भी सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद। इसमें फीस भी मात्र दो रुपए रखी गई थी। इस फीस को बाद में बढ़ाकर चार रुपये कर दिया गया।

मामला यहीं तक रहता तो बाद समझ में आती। इसके उलट कुछ समय पहले ही बाकायदा कैबिनेट ने इस फीस को बढ़ाकर सौ रुपए कर दिया था।

यह दिया गया तर्क
तर्क यह दिया गया कि शादी ब्याह जैसे गंभीर मामलों के लिए 100 रुपए भी बेहद कम ही हैं। एक तरफ केंद्र सरकार 15 रुपए में भोजन की थाली देने का वादा कर अपनी किरकिरी करा चुकी है। दूसरी ओर उत्तराखंड सरकार को सौ रुपए की कीमत नजर ही नहीं आ रही है।


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प्रदेश सरकार का यह फैसला उन स्वयं सेवी संस्थाओं पर भारी पड़ रहा है जो सामुहिक विवाह कराते हैं। एक स्वयं सेवी संस्था के पदाधिकारी के मुताबिक 20 विवाह एक पंडाल के नीचे कराने का मतलब है 2000 रुपए।

विवाह के आयोजन में एक खर्च अब यह और बढ़ा। दूसरी ओर अन्य कई राज्य हैं जो पंजीकरण दस रुपए से कम में ही करवा रहे हैं। दिल्ली में ही मात्र आठ रुपये में विवाह का पंजीकरण हो रहा है।

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लोगों का यह भी कहना है कि बाल विवाह जैसी कुरीति से बचने के लिए ही विवाह के पंजीकरण की बात सुप्रीम कोर्ट ने की थी।

ऐसे में राज्य सरकारों का यह दायित्व है कि विवाह के पंजीकरण की व्यवस्था के बारे में लोगों को जानकारी दें। पंजीकरण कैंप लगाए जाएं और लोगों को इसके लिए प्रेरित किया जाए। पर ऐसा नहीं हो रहा है।

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