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'रील' ने जोड़ी रीयल लाइफ की जोड़ी

Wed, 08 Apr 2015 08:25 AM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 08 Apr 2015 08:25 AM IST
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marriage counselling in new style.

वक्त के साथ-साथ पारिवारिक मामलों में काउंसिलिंग के तरीके भी आधुनिक हो चली है।

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प्राइवेट काउंसलर अब बंद कमरे में बातचीत से केवल सलाह नहीं थोपते, बल्कि पहले लोगों से दोस्ती, अपनेपन का नाता भी जोड़ते हैं। जरूरत के मुताबिक मूवी, लंच और सैर-सपाटे के दौरान मुश्किल से मुश्किल दुविधाएं दूर करने की कोशिश की जाती है।

बीते कुछ माह से घरेलू कलह के मामले बढ़े हैं। दून के काउंसलर्स के पास उत्तराखंड के साथ दूसरे राज्यों से भी दंपति पहुंच रहे हैं। काउंसलर्स ने भी अपने तौर-तरीके अपडेट किए हैं।
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ऑनलाइन और किताबों से टिप्स के साथ विदेशों से ट्रेनिंग ली गई है। काउंसलर्स का मानना है कि लोगों से दोस्ताना व्यवहार जरूरी है। व्यक्ति को समझे बिना काउंसिलिंग मुश्किल है।

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कांउसिलिंग के बदले कायदे

marriage counselling in new style.

- लोगों के साथ मूवी आदि देखने जाते हैं। बातचीत के दौरान लंच-डिनर रिश्तों में गरमाहट लाता है।
- व्यस्त रखने के लिए लोगों को चार्ट बनाकर दिया जाता है। इसमें व्यायाम, योग और घूमने-फिरने के टिप्स होते हैं।
- संबंधों में प्रगाढ़ता के लिए दंपतियों को रिश्तेदारों के घर घूमने की सलाह दी जाती है।
- साथ रहने के लिए ही नहीं, बेहतर भविष्य के लिए अलगाव की सलाह दी जाती है।
- नए तरीकों से करीब साठ फीसदी मामलों में सफलता मिली है। सैर-सपाटे का खर्च शिकायतकर्ता से लिया जाता है।

काउंसिलिंग के दौरान दंपति आपस में बात नहीं करते तो बाहर भेज देता हूं, ताकि कुछ समय साथ बिताएं। काउंसिलिंग के लिए कई माह का वक्त देता हूं। साथ ही मूवी और डिनर भी करता हूं। जब वे मुझे परिवार का सदस्य समझते हैं तभी बात शेयर करते हैं।
- डॉ. मुकुल, सदस्य, ऐच्छिक ब्यूरो

सबसे पहले लोगों का तनाव दूर किया जाता है। सीधे कहने के बजाय समझाने की कोशिश होती है कि व्यक्ति की फलां आदत खराब है। जरूरत पर चाय-कॉफी और गप्पे उड़ाई जाती हैं। इससे वे आसानी से घुलमिल जाते हैं।
- डॉ. प्रतिभा, मनोवैज्ञानिक, दून अस्पताल

यहां काउंसलर को ही चाहिए काउंसिलिंग

महिला हेल्पलाइन और महिला आयोग में काउंसलर्स मानते हैं कि काउंसिलिंग से वह भी अपडेट हो पाएंगे। महिला आयोग उपाध्यक्ष प्रभावती गौड़ ने बताया कि मुझे एक साल हो गया, लेकिन कोई कार्यशाला नहीं हुई। महिला हेल्पलाइन प्रभारी दीपिका राणा ने भी माना कि काउंसिलिंग के बाद बेहतर टिप्स दे पाएंगे।

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