इस डर से भारत-नेपाल सीमा पर नहीं बजी शहनाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सदियों से चले आ रहे भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते को निभा रहे कुमाऊं के नेपाल सीमा से सटे चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिले में नेपाल के ताजा राजनैतिक हालात का सीधा असर वैवाहिक संबंधों पर भी पड़ने लगा है।
विवाह लग्न शुरू हुए एक सप्ताह बीत गया, लेकिन दोनों देशों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों से न तो सीमा पार बारात गई और न ही वहां कोई बारात यहां आई। लोगों का कहना है कि मधेसी आंदोलन के बाद लोग एक-दूसरे के यहां शादी करने से बच रहे हैं।
ऐसे हालात से सीमांत लोग भय और संशय में हैं। कुमाऊं के इतिहास पर नजर डालें तो यह क्षेत्र चंद राजाओं का था। उनका नेपाल तक शासन और रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है। उस काल खंड से ही दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रोटी-बेटी के संबंध हैं। हर बार शादी के सीजन में दोनों ओर बारातें आती-जाती हैं।
खासतौर पर नेपाल में राजशाही तक यह संबंध प्रगाढ़ रहे। वहां कम्युनिस्ट प्रभाव और राजतंत्र के हटने के बाद से हालात बदले हैं। इसका असर अब साफ नजर आ रहा है। मधेसी आंदोलन से हालात और नाजुक हो गए हैं।
दोनों देशों के भावी रिश्तों को लेकर असमंजस
इस बार विवाह लग्न शुरू हुए छह दिन हो गए, लेकिन नेपाल से सटे टनकपुर, बनबसा, खटीमा से एक भी बारात न नेपाल गई और न ही वहां से यहां आई।
हालांकि, अभी तक कोई तय सगाई टूटने का मामला सामने नहीं आया है, लेकिन इस बार बारात नहीं आने-जाने से लोग दोनों देशों के भावी रिश्तों को लेकर असमंजस में हैं। चंद वंशजों के पुरोहित पंडित घनश्याम दत्त जोशी का कहना है कि इस बार के लग्नों में दोनों देशों के बीच क्षेत्र से एक भी शादी तय नहीं हुई है।
पिछले वर्ष कई शादियां हुईं थीं। उन्होंने रोटी-बेटी के रिश्ते के कम होने के सवाल पर बताया कि भविष्य की स्थिति को लेकर लोग भयभीत हैं। लोगों का मानना है कि भविष्य में भारत-नेपाल के बीच मौजूदा खुले आवागमन पर रोक लग गई तो क्या होगा। उधर, इसका असर सीमांत क्षेत्र के बाजारों में भी साफ नजर आने लगा है।