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देश का संविधान खोखला हो चुका है, इसका चीरहरण किया जा चुका है: पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू

Mon, 04 Feb 2019 10:01 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 04 Feb 2019 10:01 AM IST
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Markandey Katju said indian constitution is lost
मार्कंडेय काटजू - फोटो : Twitter

देश का संविधान खोखला हो चुका है। इसका चीरहरण किया जा चुका है। हमें यदि देश को बचाना है तो नया संविधान लागू करना ही होगा। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने बेबाकी से छात्रों के सामने अपने विचार रखे। 

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‘संविधान एवं भारत का भविष्य’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल हुए जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा कि देश का लोकतंत्र केवल जाति-धर्म के आधार पर सरकार बना रहा है। ऐसे में मैंने आज तक केवल एक बार वोट डाला है। लेकिन, अब कभी वोट नहीं दूंगा। उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को ‘ठग्स ऑफ हिंदुस्तान’ करार दिया। बोले, जब हमारे वोट की अहमियत ही नहीं तो वोट क्यों दें। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक और अधिकारी, जनता के नौकर हैं। उन्होंने लोकसभा चुनावों के परिणामों की तुलना मुगल शासक औरंगजेब के बाद की समयावधि से करते हुए कहा कि इस बार किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा।

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देश में 41 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार

गठबंधन की सरकार में यह नेता पदों के लिए ऐसे ही लड़ेंगे, जैसे औरंगजेब के बाद देश में हालात पैदा हुए थे। उन्होंने यूनिफार्म सिविल कोड का पुरजोर समर्थन किया। शरिया कानून और बुर्का प्रथा को पिछडे़पन का द्योतक बताया। उन्होंने कहा कि जेएनयू में आजादी का नारा लगाना कोई आपराधिक कृत्य नहीं हैं।

आजादी के 71 साल बाद भी देश में 41 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। नोटबंदी की वजह से दो करोड़ रोजगार छिन गए हैं। इस अवसर पर उत्तरांचल विवि के चांसलर जितेंद्र जोशी, वाइस चांसलर डॉ. एनके जोशी, लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा, डॉ. अभिषेक जोशी, कुलसचिव अजय सिंह, डॉ. मुकेश बोरा, डॉ. पूनम रावत, कुमार आशुतोष आदि मौजूद रहे।

दिव्यांशु बने विजेता
उत्तरांचल विवि के लॉ कॉलेज में हुई राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ दिल्ली के छात्र दिव्यांशु ने प्रथम पुरस्कार हासिल किया। नेशनल लॉ स्कूल रांची के मोहित पांचाल को द्वितीय और लॉ कॉलेज देहरादून की अन्ना अनुप्रिया को तृतीय पुरस्कार दिया गया।

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