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मानचित्रण, भू-आकृति से सटीक बनेंगी योजनाएं

Sun, 28 Feb 2016 12:34 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 28 Feb 2016 12:34 PM IST
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Mapping, geomorphology will become accurate plan.

पर्वतीय और वनों वाले क्षेत्रों में अगर मानचित्रण, भू-आकृति देखकर योजनाएं बनाई जाएं और स्पेस तकनीक का इस्तेमाल हो तो ये अधिक सटीक और कारगर होंगी। इनमें गलती और हवा-हवाई की गुंजाइश कम रहेगी।

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विभिन्न विभागों की परियोजनाओं में स्पेस तकनीक की उपयोगिता पर शनिवार को सुदूर संवेदी संस्थान और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के बैनर तले आयोजित कार्यशाला में यह जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विभागों ने अलग-अलग अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
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कार्यशाला में वन, लोक निर्माण, सिंचाई, पर्यटन, खनन, आपदा प्रबंधन समेत 45 विभागों के अधिकारियों ने शिरकत की। अपर मुख्य सचिव एस. राजू ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके बाद प्रत्येक विभाग के सचिव और अपर सचिव की अगुवाई में विभागीय अफसरों की टीमें बनीं। टीमों ने अलग-अलग कमरों में बैठकर विभाग की परियोजनाओं में स्पेस तकनीक के प्रयोग के संबंध में विचार मंथन किया और संक्षिप्त नोट तैयार किया, जिसे बाद में मुख्यमंत्री हरीश रावत को बताया गया। विभागों के नोट के आधार पर राज्य का विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा।
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इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के विज्ञानियों और वरिष्ठ अफसरों ने अपना प्रजेंटेशन दिया। इस मौके पर बताया गया कि मानचित्रण, भू-आकृति और जीपीएस और जीआईएस सिस्टम से किसी क्षेत्र की सटीक जानकारी मिल जाती है। विकास योजनाएं उसी लिहाज से तैयार हों। यूसैक, सुदूर संवेदी संस्थान आंकड़े उपलब्ध कराएगा। आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण, सड़क निर्माण आदि विकास कार्यों में ली जा सकती है स्पेस तकनीक की मदद ली जा सकती है। यूसैक के निदेशक डा. दुर्गेश पंत ने स्पेस तकनीक की उपयोगिता के संबंध में बताया। सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी दीपक कुमार ने कोआर्डिनेशन किया।


सीएम ने ली जानकारी
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भारतीय सुदूर संवेदी संस्थान के चेयरमैन डा. किरण कुमार से उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में स्पेस तकनीक की उपयोगिता के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की भौगोलिक स्थिति के मद्देनजर प्लान तैयार किया जाए।

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